आगरा:
आगरा की एक विशेष अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और बार-बार आदेश के बावजूद गवाही के लिए उपस्थित न होने पर एक उपनिरीक्षक (SI) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) माननीय सोनिका चौधरी ने थाना जगदीशपुरा में तैनात विवेचक राजीव कुमार का वेतन अगले आदेश तक रोकने के निर्देश पुलिस आयुक्त, आगरा को दिए हैं।
मामला क्या है ?
यह मामला वर्ष 2023 से लंबित ‘राज्य बनाम हर्ष शर्मा’ नामक मुकदमे से जुड़ा है, जो दुराचार, अश्लील हरकत और पाक्सो एक्ट (POCSO Act) की धाराओं के तहत दर्ज है। इस मामले की विवेचना उपनिरीक्षक राजीव कुमार द्वारा की गई थी।

अदालत की नाराजगी के मुख्य कारण:
* अंतिम गवाही शेष: अदालत ने पाया कि इस संवेदनशील मामले में विवेचक राजीव कुमार के अतिरिक्त अन्य सभी गवाहों की गवाही दर्ज की जा चुकी है। विवेचक की गवाही न होने के कारण ट्रायल आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
* आदेशों की अवहेलना: कोर्ट ने पूर्व में भी दरोगा को गवाही के लिए बुलाने हेतु कई प्रतिकूल आदेश पारित किए थे, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए।
* नजदीकी तैनाती के बावजूद अनुपस्थिति: अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि उपनिरीक्षक की तैनाती अदालत परिसर से मात्र 3-4 किलोमीटर की दूरी पर (थाना जगदीशपुरा) होने के बावजूद, वे गवाही देने हाजिर नहीं हो रहे हैं।
कोर्ट का सख्त निर्देश:
न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने पुलिस आयुक्त को आदेशित किया है कि:
* उपनिरीक्षक राजीव कुमार का वेतन तत्काल प्रभाव से तब तक रोका जाए जब तक कि अगला आदेश न हो।
* पुलिस आयुक्त यह सुनिश्चित करें कि आगामी 7 अप्रैल को विवेचक अनिवार्य रूप से गवाही के लिए अदालत में उपस्थित हों।
कानूनी प्रभाव: कानूनी जानकारों का मानना है कि विवेचक की गवाही किसी भी आपराधिक मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।
पाक्सो जैसे गंभीर मामलों में विवेचक की अनुपस्थिति से न केवल न्याय मिलने में देरी होती है, बल्कि अभियुक्त को इसका लाभ मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
अदालत के इस कड़े कदम को पुलिस विभाग के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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