आगरा/नई दिल्ली:
राउज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय ज्योति माहेश्वरी ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि ‘थिनर और रेड्यूसर’ (Thinner and Reducer) औद्योगिक रसायन हैं और वे आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act), 1955 के दायरे में नहीं आते हैं।
इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आरोपी मनीष कुमार अग्रवाल और मेसर्स रिलायबल इंडस्ट्रीज को सभी आरोपों से डिस्चार्ज (मुक्त) कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
सीबीआई (CBI) ने 2011 में मनीष कुमार अग्रवाल और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और पेट्रोलियम उत्पादों में मिलावट के लिए सामग्री डायवर्ट करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
आरोप था कि मेसर्स रिलायबल इंडस्ट्रीज ने मेसर्स रेनबो पेट्रोकेमिकल्स को बिना वास्तविक आपूर्ति के थिनर और रेड्यूसर की बिक्री दिखाई और जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) को गलत जानकारी दी।
कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु:
* आवश्यक वस्तु की परिभाषा: कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई नोटिफिकेशन या आदेश पेश करने में विफल रहा जो यह साबित करे कि थिनर और रेड्यूसर ‘आवश्यक वस्तुएं’ हैं।

* RTI का हवाला: आरोपी की ओर से उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से प्राप्त एक RTI जवाब पेश किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि ये उत्पाद आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत नहीं आते।
*आरोपी के अधिवक्ता के के शर्मा और अधिवक्ता मोहित शर्मा ने जोरदार पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष अकाट्य तर्क प्रस्तुत किए ।उन्होंने कहा कि सीबीआई ने इस मामले में कंफ्यूज ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन बन गई है और कभी कुछ कहती है कभी कुछ।
* जांच में खामियां: कोर्ट ने जांच को “बेहद अपर्याप्त” बताया। सीबीआई यह साबित नहीं कर सकी कि आरोपी ने नेफ्था का उपयोग थिनर या रेड्यूसर बनाने में किया था, जबकि आरोपी के पास नेफ्था के लिए वैध लाइसेंस था।
* लंबे समय तक कार्यवाही: कोर्ट ने चिंता जताई कि यह मामला 2011 से लंबित था और आरोपी ने लगभग 15 वर्षों तक कानूनी कार्यवाही का सामना किया।
कोर्ट की टिप्पणी:
न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल संदेह के आधार पर ट्रायल नहीं चलाया जा सकता।
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कोर्ट ने कहा:
“अगर अभियोजन पक्ष के पूरे सबूतों को उनके उच्चतम स्तर पर भी स्वीकार कर लिया जाए, तो भी यही निष्कर्ष निकलता है कि आरोपी दोषी नहीं हैं। ऐसी स्थिति में ट्रायल को आगे बढ़ाना केवल समय की बर्बादी होगी”
निर्णय:
अदालत ने मनीष कुमार अग्रवाल (A-1) और मेसर्स रिलायबल इंडस्ट्रीज (A-3) को धारा 120B IPC, आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7, और स्लोप (Slop) एवं नेफ्था ऑर्डर्स के उल्लंघन के आरोपों से मुक्त कर दिया है।
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