आगरा।
चेक डिसऑनर के एक पुराने मामले में सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय एनआई एक्ट के पीठासीन अधिकारी माननीय अरविंद कुमार यादव ने आरोपी को दोषी करार दिया है।
अदालत ने दोषी को तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है और साथ ही तीन लाख 12 हजार 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
मामला फाउंड्री नगर स्थित शांति व्रत एंड संस प्राइवेट लिमिटेड कोल्ड स्टोरेज से जुड़ा है। कोल्ड स्टोरेज के डायरेक्टर मयंक अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता नरेंद्र सिंह परिहार के माध्यम से न्यायालय में वाद दायर किया था।
परिवाद के अनुसार, आरोपी बबलू चौहान पुत्र राम अवतार सिंह निवासी ग्राम शेर खां, थाना खंदौली आलू का व्यापार करता था और इसी सिलसिले में उसका कोल्ड स्टोरेज में आना-जाना था।
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व्यापारिक जरूरतों के लिए आरोपी ने वर्ष 2012 में कोल्ड स्टोरेज संचालक से 15 लाख 40 हजार रुपये उधार लिए थे। इस उधारी के भुगतान के लिए आरोपी ने 15 अक्टूबर 2013 को दो लाख 50 हजार रुपये का एक चेक वादी को दिया था।
जब इस चेक को बैंक में भुगतान के लिए लगाया गया, तो वह पर्याप्त धनराशि न होने के कारण डिसऑनर हो गया। इसके बाद वादी ने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बबलू चौहान को चेक बाउंस का दोषी पाया।
अदालत ने सजा के साथ आदेश दिया कि अर्थदंड की कुल राशि में से तीन लाख पांच हजार रुपये वादी को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएं।
अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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