आगरा: १८ जुलाई ।
आगरा के खेरागढ़ थाना क्षेत्र में 2011 में हुई एक हत्या और हमले के मामले में, अपर जिला न्यायाधीश (एडीजे) संख्या 1 माननीय राजेंद्र प्रसाद ने चार आरोपियों – रघुनाथ, इशुरिया, गयाप्रसाद, और प्रेम सिंह (सभी निवासी ग्राम चित्तरवाला) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इन दोषियों पर ₹1 लाख 18 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला 28 मई 2011 का है। खेरागढ़ थाना में दर्ज शिकायत के अनुसार, वादी सुरेश पुत्र बलराम ने बताया कि उनके ताऊ जीवाराम ने अपने खेत में पालक और बैगन की फसल बोई थी। 27 मई 2011 को मोहन सिंह की बकरियों ने खेत में घुसकर फसल चौपट कर दी। इस शिकायत पर, मोहन सिंह ने पंचायत बुलाई और सुरेश के ताऊ को भला-बुरा कहकर मुआवजा देने से इनकार कर दिया।
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इसी विवाद के चलते, अगले दिन 28 मई 2011 को सुबह करीब 8:30 बजे, जब जीवाराम अपने भाई मदन, शिवचरन और गोधन के साथ खेत पर पहुंचे, तो आरोपी मोहन सिंह, रघुनाथ, इशुरिया, गयाप्रसाद और प्रेम सिंह ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से लैस होकर उन पर हमला कर दिया। इस हमले में जीवाराम की मृत्यु हो गई। बीच-बचाव करने आए गोधन, शिवचरन और मदन को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
इस मुकदमे के विचारण के दौरान, आरोपी मोहन सिंह की मृत्यु हो जाने के कारण अदालत ने उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी। अभियोजन पक्ष ने वादी सुरेश सहित कुल 13 गवाहों की गवाही दर्ज कराई।
अदालत ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) आदर्श चौधरी और अनिल अग्रवाल के तर्कों और केस फाइल में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी चार आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास व ₹1 लाख 18 हजार के अर्थदंड से दंडित किया।
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