आगरा:
अपहरण, सामूहिक दुराचार और पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने दो महिलाओं सहित चार आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला सबूतों के अभाव में सुनाया है।
क्या है पूरा मामला ?
यह मामला रकाबगंज थाने में 3 जून 2015 को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी 16 वर्षीय बेटी 2 जून 2015 की शाम को घर से बाजार गई थी, लेकिन रात 9 बजे तक वापस नहीं लौटी।
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अगले दिन, दो लोगों ने आकर बताया कि उन्होंने लड़की को ओमी, उसके बेटे रवि, पत्नी श्रीमती अनीता और बहन बीना के साथ एक इनोवा कार में जाते देखा था। इस जानकारी के आधार पर शिकायतकर्ता ने इन चारों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान बने आधार:
इस मामले में पीड़ित सहित कुल 8 गवाहों ने अदालत में बयान दिए। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उसे प्रसाद के लड्डू में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश किया और फिर उसका अपहरण कर लिया। उसने ओमी और उसके बेटे रवि पर दुष्कर्म का आरोप भी लगाया था।
हालांकि, मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। इसके अलावा, पीड़िता ने भी अदालत में अपने बयान बदल दिए।
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आरोपियों के वरिष्ठ वकीलों प्रकाश नारायण शर्मा और जय नारायण शर्मा ने इन तथ्यों को अदालत के सामने रखा।
दोनों पक्षों की दलीलें और सबूतों की जांच के बाद, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।
इसी आधार पर ओमी, रवि, श्रीमती अनीता और बीना को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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