महाकुंभ क्षेत्र में कचरा हटाने की जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार, एनजीटी जाने को कहा

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आगरा/प्रयागराज, 30 जून 2025:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ क्षेत्र में मेला प्रशासन द्वारा छोड़े गए कचरे को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ताओं को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी ) अधिनियम के तहत न्यायाधिकरण के पास याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस जयंत बनर्जी और जस्टिस मदन पाल सिंह की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एनजीटी अधिनियम की धारा 14 के तहत न्यायाधिकरण के पास इस मामले में अधिकार क्षेत्र है और वह याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे को तेजी और प्रभावी ढंग से निपटा सकता है। इसलिए, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतों के निवारण के लिए एनजीटी से संपर्क करने को कहा।

मानव अधिकार कानूनी नेटवर्क (ह्यूमन राइट्स लीगल नेटवर्क ) के साथ विधि प्रशिक्षण ले रहे देश भर के लॉ स्टूडेंट्स ने कड़ी धूप में नदी किनारे पैदल चलकर तथ्य जुटाए थे और यह जनहित याचिका दाखिल की थी।

याचिका में कहा गया था कि महाकुंभ के 45 किलोमीटर के क्षेत्र में गंगा-यमुना के किनारे मेला प्रशासन द्वारा छोड़े गए मलबे से गंदगी फैल रही है और बरसात में गंगा के प्रदूषित होने का खतरा है।

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याचिका में बताया गया था कि 26 फरवरी 2025 को कुंभ मेला के समापन पर मेला प्रशासन को तमाम दी गई सुविधाएं हटानी थीं, लेकिन उनका एक बड़ा हिस्सा क्षेत्र में ही छोड़ दिया गया है। इसमें भारी मात्रा में कचरा, मलबा, निर्माण सामग्री, लैट्रिन कमोड और ऐसी ही बहुत सारी वस्तुएं शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि बारिश शुरू होने पर यह कचरा गंगा जल को दूषित और जहरीला बना देगा।

याचिका में यह भी कहा गया था कि इस कचरे के कारण आज एक बड़े इलाके में कछार भूमि पर खीरा, ककड़ी, करेले आदि की सब्जियों की खेती रुक गई है। झूंसी में नदी किनारे के मोहल्ले प्रदूषण और दुर्गंध से प्रभावित हैं। इसके अलावा, इस कचरे से गंगा नदी के जल जीवों, वनस्पतियों को भी गंभीर खतरा है और समूचा पर्यावरण गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

यह जनहित याचिका विधि छात्रा अंशिका पाण्डेय और सात अन्य छात्रों ने दाखिल की थी, जिसमें प्रशासन को क्षेत्र में छोड़ी गई गंदगी को बरसात से पहले हटा लेने का आदेश जारी करने की मांग की गई थी।

जनहित याचिका में राज्य सरकार, डीएम प्रयागराज, कुंभ 2025 के मेला अधिकारी, नगर निगम और पुलिस कमिश्नर को पक्षकार बनाया गया था।

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मनीष वर्मा
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