आगरा:
रिश्तों में भरोसे के कत्ल और धोखाधड़ी का एक मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक चचेरे भाई ने अपनी ही बहन की पुश्तैनी जमीन खरीदने के नाम पर उसे लाखों रुपये का चूना लगा दिया।
अतिरिक्त न्यायालय संख्या-3 माननीय महेश नौटियाल के पीठासीन अधिकारी ने इस मामले में आरोपी भाई के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उसे अदालत में विचारण हेतु तलब करने के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
वादनी श्रीमती कमलेश (निवासी ग्राम लोह करेरा, रुनकता) ने अपने अधिवक्ता रोहन सिंह के माध्यम से अदालत में परिवाद दायर किया।
याचिका के अनुसार:
* श्रीमती कमलेश की ग्राम सिरौली, थाना मलपुरा में अपनी पुश्तैनी जमीन थी।
* उनके चचेरे भाई रविंद्र कुमार (निवासी ग्राम सिरौली) ने उस जमीन को खरीदने का सौदा ₹14 लाख 35 हजार में तय किया था।
* भुगतान के बदले रविंद्र ने अपनी बहन को चेक दिया था।

तीन बार बाउंस हुआ चेक:
आरोप है कि जब कमलेश ने चेक बैंक में लगाया, तो वह पर्याप्त धनराशि न होने के कारण डिसऑनर (बाउंस) हो गया।
भाई ने दोबारा चेक लगाने का आश्वासन दिया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि विपक्षी द्वारा दिया गया चेक एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार डिसऑनर हुआ।
विधिक नोटिस का भी नहीं दिया जवाब:
बार-बार चेक बाउंस होने और विधिक नोटिस (Legal Notice) भेजने के बावजूद जब भाई ने भुगतान नहीं किया, तो पीड़िता ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
अदालत की कार्रवाई:
अदालत ने मामले की गंभीरता और अधिवक्ता की दलीलों पर विचार करते हुए इसे चेक डिसऑनर (NI Act की धारा 138) का प्रथम दृष्टया मामला माना। कोर्ट ने विपक्षी रविंद्र कुमार को मुकदमे के विचारण के लिए अदालत में पेश होने हेतु समन जारी कर तलब किया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चेक डिसऑनर होने पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत कार्यवाही की जाती है, जिसमें दोषी पाए जाने पर सजा और चेक राशि के दोगुने तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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