आगरा/रोहिणी, दिल्ली।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश माननीय विप्लव डबास की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार, अपहरण और नशीला पदार्थ पिलाने के गंभीर आरोपों में घिरे छह अभियुक्तों को बरी कर दिया है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों को बिना किसी संदेह के सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला वर्ष 2015 का है, जिसमें उत्तर प्रदेश के महोबा निवासी एक युवती के भाई ने दिल्ली के शाहबाद डेयरी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पीड़िता के परिवार का आरोप था कि अभियुक्तों ने उसे नशीला रुमाल सुंघाकर अगवा किया और छह महीने तक बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया।
पुलिस ने इस मामले में अशोक कुमार, हरी चंद, इंदरपाल, मुकेश, अमर और हरेंदर उर्फ मोनू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों के बयानों में भारी विसंगतियां पाईं।
अदालत ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दिया:
1. बयानों में विरोधाभास: पीड़िता ने अदालत के समक्ष दो अलग-अलग तारीखों पर दिए गए बयानों में घटना के वर्ष और उपस्थित व्यक्तियों के नाम अलग-अलग बताए। परिवार के सदस्यों ने भी घटना के समय पीड़िता के बाहर जाने के उद्देश्य के बारे में अलग-अलग बातें कहीं।
Also Read – आगरा जनपद के न्यायालयों में ग्रीष्मकालीन समय सारणी लागू, प्रातः सात बज़े खुलेंगी अदालतें

2. आचरण पर संदेह: पीड़िता ने दावा किया कि वह छह महीने तक एक ही कपड़ों में रही और कभी स्नान नहीं किया, जिसे अदालत ने अप्राकृतिक और अविश्वसनीय माना। साथ ही, घर लौटने के बाद माता-पिता द्वारा उसका तुरंत मेडिकल चेकअप न कराना भी संदेह के घेरे में रहा।
3. विवाह का साक्ष्य: बचाव पक्ष ने पीड़िता और मुख्य अभियुक्त अमर के विवाह के फोटो और दस्तावेज़ पेश किए। अदालत ने पाया कि तस्वीरों में पीड़िता सहज दिख रही थी, जिससे अपहरण की थ्योरी कमजोर हो गई।
4. एफएसएल रिपोर्ट की विश्वसनीयता: हालांकि एफएसएल रिपोर्ट में डीएनए मिलान की बात कही गई थी, लेकिन अदालत ने नमूने लेने में हुई देरी और पीड़िता के मासिक धर्म चक्र की तारीखों को देखते हुए इस वैज्ञानिक साक्ष्य को ठोस मानने से इंकार कर दिया।
अंतिम निर्णय:
न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि यह मामला आपसी सहमति से विवाह और उसके बाद परिवार के दबाव में की गई शिकायत का प्रतीत होता है।
साक्ष्यों की कड़ियों में स्पष्ट कमी और पीड़िता के अविश्वसनीय बयानों के आधार पर सभी छह अभियुक्तों को दोषमुक्त घोषित कर दिया गया।
सभी आरोपियों की तरफ़ से प्रभावी पैरवी दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता के के शर्मा द्वारा की गई ।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin
- दिल्ली की रोहिणी अदालत का फैसला: सामूहिक बलात्कार और अपहरण के सभी आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी - May 1, 2026
- आगरा जनपद के न्यायालयों में ग्रीष्मकालीन समय सारणी लागू, प्रातः सात बज़े खुलेंगी अदालतें - May 1, 2026
- आगरा में आपसी सहमति और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करीब डेढ़ माह में हुआ विवाह विच्छेद - May 1, 2026




