आगरा।
स्थानीय परिवार अदालत ने एक महत्वपूर्ण मामले में वैवाहिक विवाद का निपटारा करते हुए शादी को विच्छेदित करने का आदेश दिया है।
इस प्रकरण में याचिका दाखिल होने के मात्र डेढ़ माह के भीतर ही पति-पत्नी की आपसी सहमति के आधार पर तलाक की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
मामले के अनुसार पिंकी और पूरन का विवाह नवंबर 2021 में संपन्न हुआ था, किंतु शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो गए।
जुलाई 2022 से ही दोनों पक्ष अलग रह रहे थे। साथ रहना संभव न होने के कारण दंपत्ति ने फरवरी 2026 में आपसी सहमति से तलाक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

वर्तमान में विदेश में रह रही पत्नी ने पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
अदालत ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्नी का मौखिक साक्ष्य अंकित किया।
साथ ही, दोनों पक्षों की ओर से छह माह की अनिवार्य कूलिंग अवधि को माफ करने का प्रार्थना पत्र भी पेश किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अदालत ने परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर छह माह की प्रतीक्षा अवधि की अनिवार्यता को समाप्त करते हुए विवाह विच्छेद की याचिका स्वीकार कर ली।
इस मामले में पत्नी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेन्द्र पाल सिंह, सुमित कुमार बघेल और मनीषा सिसौदिया ने प्रभावी पैरवी की।
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