आगरा।
स्थाई लोक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्टार हेल्थ एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह वादी को क्लेम की राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमा लेते समय यदि कंपनी ने सभी तथ्यों को सही मानकर पॉलिसी जारी की है, तो बाद में पूर्व बीमारी का हवाला देकर क्लेम खारिज करना अनुचित है।
मामला आगरा के दयालबाग क्षेत्र के निवासी विजय अग्रवाल से जुड़ा है। उन्होंने अपने अधिवक्ता राहुल सेठ के माध्यम से स्थाई लोक अदालत में वाद दायर किया था।
वादी के अनुसार, उन्होंने दिसंबर 2022 में स्वयं और अपनी पत्नी के लिए दस लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा लिया था। पॉलिसी जारी करते समय कंपनी ने किसी भी पूर्व बीमारी के न होने का उल्लेख किया था।
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दिसंबर 2023 में हृदय संबंधी समस्या होने पर वादी को पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में गंभीर स्थिति के चलते जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विपक्षी कंपनी द्वारा कैशलेस सुविधा न देने के कारण वादी को स्वयं भुगतान करना पड़ा। बाद में जब इलाज के खर्च का क्लेम किया गया, तो कंपनी ने उसे निरस्त कर दिया।
स्थाई लोक अदालत की अध्यक्ष शोभा पोरवाल तथा सदस्य हेमलता गौतम एवं पदमजा शर्मा ने मामले की सुनवाई के बाद वादी का पक्ष सही पाया।
अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह वाद दायर करने की तिथि 21 नवंबर 2024 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ कुल 3 लाख 5 हजार रुपये की क्लेम राशि 45 दिन के भीतर वादी को दे। इसके अतिरिक्त, वादी को हुए मानसिक कष्ट के लिए भी 5 हजार रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया है।
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