आगरा।
जनपद के थाना सदर बाजार में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में जेल में निरुद्ध आरोपी ऋषभ की जमानत अदालत ने स्वीकार कर ली है।
जिला जज ने बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद आरोपी की रिहाई के आदेश जारी किए।
मामले के अनुसार, वादी शशिकांत चौरसिया ने अक्टूबर 2025 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी जान-पहचान राजेश भटनागर उर्फ गब्बर से थी।
आरोप था कि राजेश ने अपनी पत्नी को एक निजी कंपनी में अधिकारी बताते हुए सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
पुराने संबंधों के आधार पर वादी ने अपने भतीजे की नौकरी के लिए सात लाख रुपये दे दिए। नौकरी न लगने पर जब रुपये वापस मांगे गए, तो बताया गया कि उक्त धनराशि ऋषभ नामक युवक को दी गई है।
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जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता नीरज पाठक ने तर्क दिया कि इस मामले में प्राथमिकी छह माह की देरी से दर्ज कराई गई है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी ने वादी से सीधे तौर पर कोई पैसा प्राप्त नहीं किया है और न ही उसके बैंक खाते में ऐसी किसी धनराशि के आने का कोई प्रमाण मिला है।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और अधिवक्ताओं की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी ऋषभ को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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