मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिल्ड्रन विंग निर्माण में लेटलतीफी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त; अधिकारियों को किया तलब

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आगरा/प्रयागराज:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एसआरएन (SRN) अस्पताल की बदहाली और निर्माणाधीन चिल्ड्रन विंग के कार्य में अत्यधिक देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई है।

हलफनामे पर कोर्ट का असंतोष:

सुनवाई के दौरान, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी द्वारा दाखिल हलफनामे को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया। हालांकि, कोर्ट ने इस हलफनामे पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि इसमें पुराने हलफनामे के ही तथ्यों को दोहराया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई है।

7 साल से लंबित निर्माण पर नाराजगी:

कोर्ट ने एसआरएन अस्पताल में चिल्ड्रन विंग का निर्माण 7 साल से पूरा न होने पर कड़ी टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि यह स्थिति तब है जब राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारी लखनऊ में तैनात हैं।

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कोर्ट ने चिंता जताई कि प्रोजेक्ट को संभवतः उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDC) के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप कार्य की गति अत्यंत धीमी है।

जर्जर भवन में इलाज को लेकर तल्ख टिप्पणी:

अदालत ने इस तथ्य पर गंभीर आपत्ति दर्ज की कि वर्तमान में अस्पताल का चिल्ड्रन विंग चर्च लेन स्थित एक जर्जर इमारत में संचालित हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि कई विभागों से एनओसी (NOC) और भूमि हस्तांतरण (Land Transfer) की प्रक्रिया अभी भी लंबित है, लेकिन राज्य के अधिकारी इस संवेदनशील मामले में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और अधिकारियों की उदासीनता:

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पाया कि एसआरएन अस्पताल में मेडिकल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कतई उत्साहित नहीं हैं।

इस उदासीनता के कारण गरीब मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या लखनऊ जैसे दूरदराज के शहरों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो कि चिंता का विषय है।

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अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश:

मामले की गंभीरता को देखते हुए, अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने आश्वासन दिया कि वे संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा कर प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने का प्रयास करेंगे।

इसके बावजूद, कोर्ट ने यूपी सिडको (UPSIDC) के मैनेजिंग डायरेक्टर, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और एसआरएन अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर रहने का आदेश दिया है।

अगली सुनवाई:

न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च को दोपहर 2:00 बजे का समय निर्धारित किया है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं और प्रगति पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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मनीष वर्मा
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