आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में किआ मोटर्स के डीलर और निर्माता को आदेश दिया है कि वे उपभोक्ता की खराब कार को या तो पूरी तरह ठीक करें या ब्याज सहित उसकी पूरी कीमत वापस लौटाएं।
आयोग ने कार में बार-बार आने वाली तकनीकी खराबी को ‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ (निर्माण संबंधी दोष) की श्रेणी में माना है।
क्या है पूरा मामला ?
आगरा निवासी शशांक सहगल ने 19 मार्च 2020 को प्रेम व्हील्स (डीलर) से लगभग 33.95 लाख रुपये में एक किआ कार्निवल कार खरीदी थी।
परिवादी के अनुसार, कार खरीदने के कुछ समय बाद ही उसमें स्टार्ट होने और चलते-चलते बंद होने की समस्या आने लगी।
रिकॉर्ड के अनुसार:
उपभोक्ता ने 2021 से 2024 के बीच कई बार (लगभग 8 बार) कार को सर्विस सेंटर भेजा।
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बार-बार रिपेयर होने के बावजूद गाड़ी की समस्या दूर नहीं हुई।
9 जून 2024 से कार डीलर के वर्कशॉप में ही खड़ी है।
नोटिस के बावजूद कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक समाधान नहीं दिया गया।
आयोग की सख्त टिप्पणी:
न्यायालय के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि किसी वाहन में बार-बार खराबी आती है, तो उसे निर्माण संबंधी दोष माना जाएगा।
चूंकि विपक्षी गण (डीलर और निर्माता) नोटिस के बावजूद आयोग में उपस्थित नहीं हुए, इसलिए यह फैसला एकपक्षीय रूप से सुनाया गया।
अदालत का मुख्य आदेश:
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धाराओं के तहत सेवा में कमी पाते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
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मरम्मत का आदेश: विपक्षी 45 दिनों के भीतर कार (UP 80 FM 7474) को सही ढंग से ठीक करके परिवादी को सौंपें।
विकल्प के तौर पर रिफंड: यदि मरम्मत नहीं की जाती है, तो विपक्षी को कार की मूल कीमत 33,95,000/- रुपये पर खरीद की तिथि (19.03.2020) से 6% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करनी होगी।
मुआवजा: इसके अलावा, उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये और वाद व्यय के रूप में 10,000/- रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
विलंब पर जुर्माना: यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर 6% से बढ़ाकर 9% वार्षिक कर दी जाएगी।
आयोग ने परिवादी को निर्देश दिया है कि वह इस निर्णय की प्रमाणित प्रति शीघ्र प्राप्त कर विपक्षी गण को अनुपालन हेतु भेजें।
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