आगरा।
जनपद के थाना मनसुखपुरा क्षेत्र के एक बहुचर्चित हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-15) माननीय राजीव कुमार पालीवाल ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में पाए गए गंभीर विरोधाभासों के चलते हत्या के आरोपी 6 लोगों को बाइज्जत बरी करने के आदेश दिए हैं।
बरी होने वालों में रामकिशोर, सौरभ, ऋषि, नंदू उर्फ नंद किशोर, राजपाल और करुआ (सभी निवासी ग्राम बाजका पुरा, थाना मनसुखपुरा) शामिल हैं।
जानिये क्या था मामला ?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी सोबरन सिंह ने आरोप लगाया था कि 11 जनवरी 2022 की शाम को उनके पुत्र ओमप्रकाश पर पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने घात लगाकर हमला किया था।
आरोप था कि लाठी, डंडे, सरिया और कुल्हाड़ी से प्रहार कर ओमप्रकाश को अधमरा कर कीचड़ में फेंक दिया गया था, जिनकी बाद में एस.एन. अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

बरी होने के मुख्य कारण:
* बरामदगी में विफलता: वादी ने आरोप लगाया था कि हत्या में कुल्हाड़ी, सरिया और डंडों का इस्तेमाल हुआ, लेकिन पुलिस जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर मात्र एक लाठी ही बरामद कर सकी। हथियार बरामद न होना बचाव पक्ष के लिए मजबूत बिंदु रहा।
* गवाहों के बयानों में विरोधाभास: अभियोजन ने वादी सहित कुल 7 गवाह पेश किए। लेकिन सुनवाई के दौरान इन गवाहों के बयानों में समय, घटनाक्रम और परिस्थितियों को लेकर इतने गंभीर विरोधाभास सामने आए कि अदालत ने उन पर भरोसा करना उचित नहीं समझा।
* प्रभावी कानूनी पैरवी: आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार पचोरी और आयुष गोंड ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को रंजिशवश झूठा फंसाया गया है और पुलिस के पास आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत नहीं हैं।
अदालत का फैसला:
न्यायाधीश माननीय राजीव कुमार पालीवाल ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप सिद्ध करने में विफल रहा है। इसी आधार पर सभी 6 आरोपितों को दोषमुक्त करार दिया गया।
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