आगरा।
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-10, आगरा) के पीठासीन अधिकारी माननीय प्रदीप कुमार-IV ने एक महत्वपूर्ण विधिक आदेश पारित करते हुए, पुलिस विवेचना के दौरान छोड़े गए नामजद अभियुक्त गुड्डू को धारा 319 दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत सह-अभियुक्त के रूप में मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी कर तलब किया है।
न्यायालय ने यह आदेश वादी मुकदमा बनै सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र (16ख) को स्वीकार करते हुए दिया।
क्या है पूरा मामला ?
मामला थाना बमरौली कटारा क्षेत्र के अंतर्गत मु.अ.सं. 63/2023 से जुड़ा है। वादी बनै सिंह ने दिनांक 28.08.2023 को थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके 65 वर्षीय पिता मेघ सिंह शाम को टहलने निकले थे।
रास्ते में रामस्वरूप के खेत (जिसे अभियुक्त बिजेन्द्र कटारा और गुड्डू बटाई/भेज पर लेकर खेती करते थे) के चारों ओर जंगली पशुओं से सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली का खुला तार बिछाया गया था।
इस हाई-वोल्टेज करंट वाले तार की चपेट में आने से मेघ सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई।
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पुलिस ने विवेचना में नामजद अभियुक्त को बचाया:
वादी ने मूल प्राथमिकी (F.I.R.) में गुड्डू पुत्र भूप सिंह को नामजद किया था। परंतु, पुलिस विवेचक ने अपनी जांच में कथित रूप से गुड्डू की नामजदगी को गलत बताते हुए उसका नाम केस से पृथक कर दिया और केवल बिजेन्द्र कटारा के विरुद्ध धारा 304 भा.द.सं. (गैर-इरादतन हत्या) के तहत कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
आरोप पत्र में इस बात का कोई स्पष्ट आधार नहीं दर्शाया गया कि नामजद अभियुक्त गुड्डू का नाम किस आधार पर हटाया गया।
अदालत में गवाहों के बयानों ने खोली पोल:
मामले के सत्र सुपुर्द होने के बाद, न्यायालय में अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाहों के बयानों ने पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए:
वादी बनै सिंह (PW-01):अपने सशपथ बयान में स्पष्ट किया कि यह खेत बिजेन्द्र और गुड्डू मिलकर करते हैं और जानलेवा बिजली का तार इन दोनों ने मिलकर ही लगाया था। विरोध करने पर भी इन्होंने तार नहीं हटाया था।
उदय सिंह (PW-02):कोर्ट को बताया कि खेत के लिए बिजली का करंट शशिकांत से गुड्डू के जरिए लिया गया था और उन्होंने दोनों को खेत में एक साथ काम करते देखा है।
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डॉ० धर्मवीर सिंह (PW-03):पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सीय साक्ष्य के आधार पर पुष्टि की कि मृतक की मौत हाई वोल्टेज इलेक्ट्रिक शॉक के कारण हुई थी।
‘दोषियों को कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जा सकता’ — न्यायालय
अपर सत्र न्यायाधीश ने इलाहबाद उच्च न्यायालय के विधिक सिद्धांतों (रामेश्वर एवं अन्य बनाम उ०प्र० सरकार) का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि धारा 319 CrPC का मुख्य उद्देश्य किसी ऐसे व्यक्ति को बच निकलने से रोकना है जो वांछित है और मुकदमे की सुनवाई का सामना करने के योग्य है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा:
“पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक एवं प्रलेखीय साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त बिजेन्द्र कटारा के साथ मिलकर प्रस्तावित अभियुक्त गुड्डू के द्वारा भी घटना कारित करने की संलिप्तता प्रथम दृष्टया परिलक्षित होती है… इस स्तर पर दोषसिद्धि की संभावना को नहीं, बल्कि विचारण के लिए पर्याप्त साक्ष्य की उपलब्धता को देखा जाता है।”
न्यायालय का अंतिम आदेश:
अदालत ने वादी बनै सिंह के प्रार्थना पत्र को मंजूर करते हुए अभियुक्त गुड्डू को धारा 304 भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध में विचारण हेतु तलब करने का आदेश जारी किया।
कोर्ट ने अभियुक्त के खिलाफ समन जारी करते हुए आगामी सुनवाई के लिए 02 जून 2026 की तिथि नियत की है।वादी की तरफ़ से पैरवी अधिवक्ता संदीप सिंह द्वारा की गई ।
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