आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम), आगरा ने सेवा में कमी का दोषी पाते हुए टाटा स्काई (वर्तमान में टाटा प्ले) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता को गलती से रिचार्ज हुई अतिरिक्त राशि ब्याज सहित लौटाए और साथ ही मानसिक प्रताड़ना व वाद व्यय के लिए हर्जाना भी भरे।
क्या था पूरा मामला ?
कासगंज निवासी हरी प्रकाश (परिवादी) ने 20 जून 2021 को अपने टाटा स्काई सेट-टॉप बॉक्स को रिचार्ज करते समय मानवीय भूल के कारण 510/- रुपये के स्थान पर 5100/- रुपये का भुगतान कर दिया था।
इसकी सूचना तत्काल कंपनी के ग्राहक सेवा प्रतिनिधि को दी गई। प्रतिनिधि के कहने पर परिवादी ने 50/- रुपये ‘रिफंड शुल्क’ भी जमा किया, लेकिन इसके बावजूद 4590/- रुपये की अतिरिक्त राशि वापस नहीं मिली। थक-हारकर उपभोक्ता ने अधिवक्ता नन्द किशोर के माध्यम से आयोग की शरण ली।
कंपनी की दलीलें और आयोग का निष्कर्ष:
* कंपनी का पक्ष: टाटा स्काई ने स्वीकार किया कि रिचार्ज 5100/- रुपये का हुआ था, लेकिन दावा किया कि उन्होंने अपनी सहयोगी कंपनी (Euronet Services) के माध्यम से रिफंड पहले ही कर दिया है।
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* आयोग का अवलोकन: आयोग ने पाया कि परिवादी की पत्नी (जिसके खाते से भुगतान हुआ था) के बैंक स्टेटमेंट में कोई रिफंड प्रदर्शित नहीं हो रहा था। आयोग ने माना कि ट्रांजेक्शन आईडी का हवाला देना मात्र पर्याप्त नहीं है जब तक कि पैसा उपभोक्ता के खाते में न पहुंचे।
आयोग का आदेश:
अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने निम्नलिखित आदेश पारित किए:
* मूल राशि: कंपनी अतिरिक्त 4,590/- रुपये 6% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस करे।
* क्षतिपूर्ति: उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 5,000/- रुपये का भुगतान किया जाए।
* वाद व्यय: परिवादी को कानूनी खर्च के रूप में 5,000/- रुपये दिए जाएं।
* समय सीमा: यह पूरी राशि 45 दिनों के भीतर आयोग के खाते में जमा करनी होगी। देरी होने पर ब्याज दर 6% से बढ़ाकर 9% कर दी जाएगी।
साथ ही आयोग ने कंपनी को यह छूट दी है कि वह अपनी सहयोगी कंपनी (Euronet Services) से यह राशि नियमानुसार वसूल सकती है।
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