पांच उपभोक्ताओं की जीत से आगरा के स्टोर संचालकों में हड़कंप
आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने शॉपिंग के दौरान कैरी बैग के नाम पर ग्राहकों की जेब काटने वाले स्टोर संचालकों को आईना दिखाया है।
आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में वी-मार्ट रिटेल लिमिटेड को जमकर फटकार लगाते हुए ग्राहकों से वसूले गए छह रुपये वापस करने और भारी-भरकम जुर्माना भरने का आदेश दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने वाले पांच अलग-अलग उपभोक्ताओं ने अकेले ही इस बड़े ब्रांड के खिलाफ मोर्चा खोला और कानूनी जीत हासिल की।
न्यायालय के इस फैसले ने ग्राहकों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। मुकदमे में सामने आया कि दीपक त्यागी, आशीष बिन्दुसार, रोहित अग्रवाल, सौरभ अग्रवाल और शीतल बंसल ने जब अलग-अलग समय पर वी-मार्ट के कमला नगर स्थित स्टोर से खरीदारी की, तो बिलिंग काउंटर पर उनसे कैरी बैग के नाम पर छह रुपये ऐंठ लिए गए।
हैरान करने वाली बात यह थी कि उन थैलों पर कंपनी का नाम और विज्ञापन छपा हुआ था, जिसका उपयोग वी-मार्ट अपनी ब्रांडिंग के लिए कर रहा था।
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न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया।
न्यायालय ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो कैरी बैग विक्रेता खुद अपनी पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल कर रहा है, उसके लिए ग्राहक से पैसे वसूलना सरासर अनुचित व्यापार व्यवहार है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक से सामान की सुरक्षा के नाम पर पैकिंग सामग्री के लिए पैसे लेना उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
इस पूरे प्रकरण में पांचों वादियों दीपक त्यागी, आशीष बिन्दुसार, रोहित अग्रवाल, सौरभ अग्रवाल और शीतल बंसल के साहस की चर्चा हर तरफ हो रही है।
आयोग ने वी-मार्ट रिटेल लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह इन पांचों उपभोक्ताओं को उनके छह रुपये, छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए।
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इतना ही नहीं, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति के लिए दस हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये की अतिरिक्त राशि भी स्टोर को जमा करनी होगी।
न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि 45 दिनों के भीतर यह भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज की दर छह से बढ़ाकर नौ प्रतिशत कर दी जाएगी।
यह निर्णय उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो ग्राहकों को सामान के साथ मुफ्त मिलने वाले बैग के लिए भी मजबूरन पैसे देने को विवश करते थे।
अब देखना यह है कि न्यायालय के इस कठोर फैसले के बाद शहर के अन्य मॉल और स्टोर अपनी मनमानी पर लगाम लगाते हैं या नहीं।
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