आगरा:
बहुचर्चित बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय हत्याकांड में मंगलवार को आगरा की अदालत ने ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया है। एडीजे-17 माननीय नितिन कुमार ठाकुर की कोर्ट ने कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेंद्र रावत को साक्ष्य मिटाने के आरोप में सात वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है।
वहीं, उनकी पुत्री प्रियंका उर्फ मोना और पुत्र कृष्णा रावत को बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। सज़ा सुनाए जाने के बाद तीनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
यह मामला थाना ताजगंज क्षेत्र से जुड़ा है। मृतक बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत थे और उनकी शादी फरवरी 2015 में बिजेंद्र रावत की पुत्री प्रियंका उर्फ मोना से हुई थी।

वादी और सचिन के पिता केशव देव शर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि शादी के बाद से ही प्रियंका अलग रहने का दबाव बनाती थीं और छोटी-छोटी बातों पर विवाद करती थीं।
वादी के अनुसार, सितंबर 2023 में सचिन द्वारा अपने भाई के नाम पेट्रोल पंप के लिए आवेदन करने की जानकारी मिलने के बाद ससुराल पक्ष ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि 11 अक्टूबर को प्रियंका, उनके भाई कृष्णा रावत और पिता बिजेंद्र रावत ने मिलकर सचिन को घर में बंद कर प्रताड़ित किया।
12 अक्टूबर की शाम बिजेंद्र रावत ने फोन पर सचिन की मौत की सूचना दी। परिवार जब मौके पर पहुंचा तो सचिन के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले। 13 अक्टूबर 2023 को परिवार की मांग पर चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें हत्या की पुष्टि हुई। इसके बाद 18 अक्टूबर को हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच के दौरान, 20 अक्टूबर को कृष्णा रावत को गिरफ्तार किया गया, जबकि 29 अक्टूबर को बिजेंद्र और प्रियंका को प्रयागराज से गिरफ़्तार किया गया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 18 गवाह और बचाव पक्ष की ओर से 4 गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने प्रियंका उर्फ मोना और कृष्णा रावत को हत्या का तथा बिजेंद्र रावत को सबूत नष्ट करने का दोषी करार दिया।
बुधवार को न्यायालय ने फ़ैसला सुनाते हुए प्रियंका और कृष्णा को आजीवन कारावास और बिजेंद्र रावत को सात वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई।
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