आगरा:
चेक डिसऑनर (Cheque Dishonor) के एक मामले में, विशेष न्यायालय एन.आई. एक्ट (Negotiable Instruments Act) के पीठासीन अधिकारी माननीय अरविंद कुमार यादव ने आरोपी गौरव प्रकाश श्रीवास्तव (पुत्र प्रेम श्रीवास्तव, निवासी न्यू चंद्र नगर, आगरा) को तकनीकी कारणों के आधार पर बरी करने का आदेश दिया है।
मुकदमे का विवरण:
वादी कुलदीप त्रिवेदी (निवासी न्यू कौशल पुर, न्यू आगरा) ने मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया था कि:
* आरोपी गौरव श्रीवास्तव ने 1 जनवरी 2018 को उनसे एक लाख रुपये उधार लिए थे और पांच माह में वापस करने का वादा किया था।
* वादा पूरा न होने पर, आरोपी ने 1 मई 2018 को बैंक ऑफ इंडिया, लॉयर्स कॉलोनी शाखा का एक लाख रुपये का चेक दिया, जो बाद में डिसऑनर हो गया। इसके बाद वादी ने मुकदमा दायर किया।
बचाव पक्ष के तर्क और अदालत का निर्णय:
मुकदमे के विचारण के दौरान, आरोपी के अधिवक्ता खुर्शीद अली ने महत्वपूर्ण तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को बताया कि:
* आरोपी गौरव श्रीवास्तव ने वर्ष 2016 में ही अपनी बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) की शाखा को पत्र लिखकर उस विवादित चेक का ‘स्टॉप पेमेंट’ करा दिया था।
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* उन्होंने बताया कि यह चेक घर के निर्माण हेतु निर्गत किया गया था, लेकिन विषम हालातों में अनुबंध निरस्त होने के कारण स्टॉप पेमेंट कराया गया था और खाता भी बंद कर दिया गया था।
* अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि जब चेक का स्टॉप पेमेंट वर्ष 2016 में ही हो चुका था, तो वादी ने दो वर्ष बाद यानी वर्ष 2018 में वह चेक अदालत में कैसे जमा कर दिया।
अदालत ने आरोपी के अधिवक्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए पाया कि वादी ‘क्लीन हैंड’ (साफ नीयत) के साथ अदालत में नहीं आया है।
स्टॉप पेमेंट और साक्ष्य के अभाव को देखते हुए, अदालत ने आरोपी गौरव प्रकाश श्रीवास्तव को बरी करने का आदेश दिया।
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