आगरा।
फर्जी शपथ पत्र के आधार पर प्रांतीय सशस्त्र पीएसी (PAC) में आरक्षी (कांस्टेबल) के पद पर तैनाती पाने वाले एक आरोपी को न्यायालय ने दोषी करार दिया है।
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शिवानंद गुप्ता की अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को तीन वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
यह फैसला मुकदमा दर्ज होने के लगभग 26 वर्ष बाद आया है।
मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर:
थाना ताजगंज में दर्ज मुकदमे के विवरण के अनुसार, एआरआईएम कार्यालय के तत्कालीन कार्यवाहक प्रधान लिपिक प्रदीप कुमार वर्मा ने आरोपी के विरुद्ध पुलिस को तहरीर दी थी।
वादी द्वारा 8 सितंबर 1998 को दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया था कि भोजराज सिंह (पुत्र ओंकार सिंह), निवासी ग्राम सिथरापुर, सादाबाद, जिला हाथरस ने विभाग में फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत कर धोखाधड़ी की और अवैध रूप से पीएसी में आरक्षी का पद प्राप्त किया।
Also Read – चांदी व्यवसायी से 1.12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी मामले में आरोपी की जमानत निरस्त

पुलिस विवेचना और आरोप पत्र:
प्रधान लिपिक की तहरीर के आधार पर ताजगंज थाना पुलिस ने 1 जनवरी 1999 को आरोपी आरक्षी भोजराज सिंह के विरुद्ध धोखाधड़ी सहित अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करने के बाद 31 मई 1999 को न्यायालय के समक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत कर दिया था।
न्यायालय का फैसला:
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पी.ओ. राजेश कुमार ने अदालत में पैरवी की और अपने तर्क प्रस्तुत किए।
Also Read – मां की बीमारी के लिए लिए 3.50 लाख उधार, बोगस चेक देने पर अदालत ने आरोपी को किया तलब
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शिवानंद गुप्ता ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अभियोजन अधिकारी की दलीलों का गहनता से अवलोकन किया।
अदालत ने आरोपी भोजराज सिंह को धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का दोषी पाते हुए तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर 3,000/- रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
26 वर्ष तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद न्यायालय ने इस सजा के साथ पत्रावली का अंतिम रूप से निस्तारण कर दिया है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Channel Bulletin & Group Bulletin
- उपभोक्ता आयोग प्रथम का अहम फैसला: लोन चुकता होने के बाद मूल बैनामा वापस न करने पर पीएनबी पर लगाया दो लाख तीस हज़ार का जुर्माना - August 24, 2026
- 6 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म मामले में पॉक्सो कोर्ट का फैसला, दोषी को 20 वर्ष की कैद और जुर्माना - August 22, 2026
- 8 लाख 25 हजार रुपये के चेक डिसऑनर होने पर आरोपी अदालत में तलब - August 22, 2026




