आगरा।
नकली और कम गुणवत्ता वाले सोने के आभूषणों को गिरवी रखकर लाखों रुपये का गोल्ड लोन स्वीकृत करने और वित्तीय कंपनी को 87 लाख 4 हजार रुपये का चूना लगाने के गंभीर मामले में जिला जज माननीय संजय कुमार मलिक की अदालत ने एक गोल्ड वैलुअर को राहत देने से इंकार कर दिया है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला ?
* यह मुकदमा थाना सिकंदरा में कैपरी ग्लोबल कैपिटल (शास्त्रीपुरम, जिला आगरा) के रीजनल मैनेजर अमरेश श्रीवास्तव द्वारा दर्ज कराया गया था।
* आरोपी की पहचान हरी मोहन (पुत्र हरी ओम सिंह, निवासी नगला हीरा सिंह, थाना कागारोल, जिला आगरा) के रूप में हुई है, जो उक्त कंपनी में गोल्ड वैलुअर के पद पर कार्यरत था।
* वादी का आरोप है कि आरोपी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा।
* आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने परिचितों के नकली और बेहद कम गुणवत्ता वाले जेवर कंपनी में गिरवी रखवाए और उन पर लाखों रुपये का गोल्ड लोन स्वीकृत कर दिया।
* इस धोखाधड़ी और गबन के चलते कंपनी को कुल 87 लाख 4 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।

अभियोजन पक्ष की दलीलें और अदालत का आदेश:
अदालत में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता राधा कृष्ण गुप्ता ने मजबूती से अपना पक्ष रखा।
उन्होंने आरोपी द्वारा रचे गए आपराधिक षड्यंत्र और गबन की बड़ी धनराशि का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया।
जिला जज ने जिला शासकीय अधिवक्ता के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मामले को गंभीर प्रकृति का माना।
गबन और धोखाधड़ी के इस कृत्य को देखते हुए अदालत ने आरोपी हरी मोहन की अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त करने के आदेश पारित किए।
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