आगरा ।
उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम एवं अन्य गंभीर धाराओं में निरुद्ध आरोपी जतिन कपूर की जमानत याचिका को जिला जज माननीय संजय कुमार मलिक ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज करने के आदेश दिए हैं।
आरोपी जतिन कपूर पुत्र विनय कपूर, मूलचंद कॉलोनी, आदर्श नगर, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली का निवासी है। इस चर्चित मामले में पूर्व में भी कई अन्य सह-आरोपियों की जमानत याचिकाएं न्यायालय द्वारा निरस्त की जा चुकी हैं।
थाना सदर में दर्ज मामले के विवरण के अनुसार, वादी मुकदमा ने अपनी दो पुत्रियों के 24 मार्च 2025 को बिना बताए घर से अचानक लापता हो जाने पर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
वादी की एक पुत्री वर्ष 2021 में भी घर से चली गई थी, जो जम्मू-कश्मीर के उधमपुर थाने के अंतर्गत बरामद हुई थी।
उस समय उसके साथ साइमा उर्फ खुशबू नाम की एक अन्य लड़की भी मिली थी, जिसके बाद समझाने-बुझाने पर पुत्री घर वापस आ गई थी।
इस बार दोनों पुत्रियों के लापता होने पर वादी ने साइमा उर्फ खुशबू पर ही उनके अपहरण का शक जताया था।
थाना सदर पुलिस ने मामले की तफ्तीश करते हुए वादी की दोनों पुत्रियों को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र तपसिया से सकुशल बरामद किया था।
इस बरामदगी के बाद पुलिस ने अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया था।
पुलिस ने इस मामले में आयशा सहित दस आरोपियों को गिरफ्तार किया था, और इसी जांच के क्रम में आरोपी जतिन कपूर की भी गिरफ्तारी की गई थी।
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जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राधा कृष्ण गुप्ता एवं वादी के अधिवक्ता जगदीश कुमार ने अदालत में पुरजोर तर्क दिए कि आरोपी और उसके साथी एक संगठित गिरोह बनाकर काम करते हैं।
यह गिरोह सीधे-साधे लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर और गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कराता है।
आरोपियों द्वारा लोगों को इस्लाम धर्म की खूबियां बताने और हिंदू धर्म के प्रति दुष्प्रचार कर समाज में वैमनस्य फैलाने का कार्य किया जा रहा था।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और मामले से जुड़े साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपराध को समाज के विरुद्ध अत्यंत गंभीर प्रकृति का माना।
जिला जज ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाना न्यायोचित नहीं होगा, जिसके चलते आरोपी जतिन कपूर का जमानत प्रार्थना पत्र तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया गया।
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