आगरा ।
आगरा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में बिजली कंपनी द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के पुराने बकाया की वसूली के लिए वर्तमान उपभोक्ता को भेजे गए नोटिस को सेवा में कमी मानते हुए निरस्त कर दिया है।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने यह आदेश भावना कुलश्रेष्ठ द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई के बाद पारित किया।
मामले के तथ्यों के अनुसार, परिवादिनी भावना कुलश्रेष्ठ के पिता स्वर्गीय अशोक कुमार कुलश्रेष्ठ के नाम पर आगरा के भाग्यनगर कॉलोनी में एक घरेलू विद्युत संयोजन (संख्या 674045997) संचालित था।
पिता की मृत्यु के बाद परिवादिनी नियमित रूप से बिलों का भुगतान करते हुए इस कनेक्शन का उपयोग कर रही थी। विवाद तब शुरू हुआ जब टोरेन्ट पावर लिमिटेड ने परिवादिनी को एक नोटिस भेजकर 2,27,350.82/- रुपये जमा करने का निर्देश दिया।

यह बकाया राशि सुरेश चन्द कुलश्रेष्ठ के नाम वाले एक अन्य विद्युत संयोजन (संख्या 670145962) से संबंधित थी, जो कथित तौर पर उसी परिसर में था।
बिजली कंपनी का तर्क था कि विद्युत अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, एक ही परिसर पर किसी अन्य व्यक्ति के पुराने बकाया को चुकाने का दायित्व वर्तमान निवासी पर डाला जा सकता है।
हालांकि, परिवादिनी ने इसका विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि उसके पिता के कनेक्शन का उक्त बकाया वाले कनेक्शन से कोई संबंध नहीं है।
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आयोग ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि परिवादिनी के पिता के नाम वाले कनेक्शन पर कोई बकाया देय नहीं था। आयोग ने निर्धारित किया कि किसी तीसरे व्यक्ति (सुरेश चन्द कुलश्रेष्ठ) के बकाया की वसूली के लिए परिवादिनी को नोटिस भेजना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
अपने अंतिम आदेश में, आयोग ने बिजली कंपनी द्वारा 24 नवंबर 2023 को जारी किए गए नोटिस को निरस्त कर दिया।
साथ ही, आयोग ने निर्देश दिया कि परिवादिनी अपने वर्तमान विद्युत संयोजन का पूर्व की भांति उपभोग करती रहे और नियमित बिलों का भुगतान जारी रखे।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
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