आगरा।
अवैध संबंधों के चलते भतीजी के पति का लिंग काटने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी फुफिया ससुर को दोषमुक्त कर दिया है।
एडीजे 8 माननीय संजय के. लाल की अदालत ने गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास और पुलिस विवेचना में मिली गंभीर खामियों को आधार मानते हुए आरोपी शैलेंद्र को बरी करने के आदेश दिए।
मामला थाना सदर क्षेत्र का है, जहां वादी लोहरे राम ने तहरीर दी थी कि उनके पुत्र राम सहाय की शादी करीब छह माह पूर्व एटा निवासी किताब सिंह की पुत्री सरोज के साथ हुई थी।
आरोप था कि सरोज के अपने फुफिया ससुर शैलेंद्र के साथ अवैध संबंध थे, जिसका विरोध करने पर विवाद होता था। वादी के अनुसार, शादी के समय ही उसकी पुत्रवधू गर्भवती थी।
घटना वाले दिन आरोपी शैलेंद्र और सरोज के परिजन पीड़ित राम सहाय को आगरा रहने के बहाने साथ ले आए थे। 22 मई 2014 की सुबह राम सहाय एक पेट्रोल पंप के पास बेहोशी की हालत में मिला और उसका लिंग कटा हुआ था।
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पीड़ित राम सहाय ने अदालत को बताया कि घटना की रात पत्नी द्वारा बनाए गए खाने को खाकर वह बेहोश हो गया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी शैलेंद्र और पत्नी सरोज के विरुद्ध अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए थे, जिसके कारण दोनों की पत्रावली पृथक हो गई थी। वर्तमान निर्णय केवल शैलेंद्र के विचारण को लेकर आया है।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस संवेदनशील मामले की विवेचना में पुलिस ने भारी लापरवाही बरती।
विवेचक ललित भाटी ने न तो घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी बरामद की और न ही पीड़ित के कपड़ों को जांच के लिए सील किया।
इतना ही नहीं, जिस भोजन को खाकर पीड़ित के बेहोश होने की बात कही गई, उसकी भी कोई बरामदगी या रासायनिक जांच नहीं कराई गई।
अदालत ने यह भी गौर किया कि पुलिस उन मुख्य चश्मदीद गवाहों को न्यायालय में पेश करने में विफल रही, जिन्होंने कथित तौर पर आरोपी सरोज को मौके से भागते हुए देखा था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता हैदर अली खान के तर्कों और साक्ष्यों की कमी को देखते हुए अदालत ने आरोपी शैलेंद्र को बरी कर दिया।
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