आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का बड़ा निर्णय: सीएनसी मशीन में निर्माण दोष मिलने पर कीमत ब्याज सहित लौटाने का आदेश

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विपक्षी कंपनी को दोषपूर्ण सीएनसी मशीन की पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाने या नई मशीन उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने यह आदेश विजय कुमार विज द्वारा वर्ष 2011 में दायर किए गए परिवाद पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

मामले के अनुसार, परिवादी विजय कुमार विज ने अपनी जूते का सोल बनाने वाली फर्म के लिए 2 दिसंबर 2009 को दिल्ली स्थित एंजल इंडिया इम्पैक्स कंपनी से 5,10,000/- रुपये में एक सीएनसी मशीन खरीदी थी।

मशीन लगने के बाद से ही सुचारू रूप से कार्य नहीं कर रही थी और उसमें ग्राफिकल प्लॉटिंग संबंधी गंभीर समस्याएं आ रही थीं। कंपनी के इंजीनियरों ने कई बार मशीन को ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन वे विफल रहे और अंततः मशीन में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट होने की बात स्वीकार की।

परिवादी की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता रवि कुमार ने दलील दी कि बार-बार शिकायत और विधिक नोटिस के बावजूद न तो कंपनी ने मशीन बदली और न ही पैसे वापस किए, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापार पद्धति की श्रेणी में आता है।

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विपक्षी कंपनियों की ओर से कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण आयोग ने मामले की एकपक्षीय सुनवाई की।

आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और वारंटी प्रपत्रों का संज्ञान लेते हुए माना कि मशीन में निर्माण दोष मौजूद था और वारंटी अवधि के भीतर इसे ठीक करना या बदलना कंपनी की कानूनी जिम्मेदारी थी।

अपने आदेश में आयोग ने विपक्षीगण को संयुक्त रूप से निर्देशित किया है कि वे निर्णय की तिथि से 45 दिन के भीतर परिवादी को उसी मॉडल की नई सीएनसी मशीन प्रदान करें।

वैकल्पिक रूप से, कंपनी को मशीन की कीमत 5,10,000/- रुपये पर खरीद की तिथि 2 दिसंबर 2009 से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, परिवादी को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 10,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये की क्षतिपूर्ति देने का भी निर्देश दिया गया है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर 6 प्रतिशत से बढ़कर 9 प्रतिशत वार्षिक देय होगी।

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विवेक कुमार जैन
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