आगरा/प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर में एक निर्माणाधीन मस्जिद को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के मामले में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि आखिर किस कानूनी अधिकार के तहत किसी पूजा स्थल को बिना पूर्व सूचना या सुनवाई का अवसर दिए सील किया जा सकता है।
मामला क्या है ?
यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने अहसान अली द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि उन्होंने मुजफ्फरनगर के तहसील जानसठ स्थित ग्राम भोपा में प्लॉट संख्या 780 को वैध रूप से खरीदा था और वहां मस्जिद का निर्माण करवा रहे थे।
प्रशासन ने इस निर्माण को ‘अवैध’ बताते हुए और बिना अनुमति निर्माण का हवाला देकर परिसर को सील कर दिया था।
हाईकोर्ट द्वारा उठाए गए 3 प्रमुख सवाल:
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकारी वकील से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:

* कानूनी अधिकार: राज्य सरकार विधि के किस अधिकार (Authority of Law) के तहत किसी पूजा स्थल को सील कर सकती है ?
* पूर्व अनुमति की अनिवार्यता: क्या कानून में ऐसा कोई प्रावधान है जिसके तहत पूजा स्थल से संबंधित मामलों में राज्य से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य हो ?
* प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: क्या सरकार के पास बिना किसी पूर्व नोटिस या याचिकाकर्ता को पक्ष रखने का मौका दिए निर्माणाधीन परिसर को सील करने का अधिकार मौजूद है ?
याचिकाकर्ता की दलील:
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जगदीश प्रसाद मिश्रा ने कोर्ट में दलील दी कि संपत्ति का स्वामित्व वैध है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने परिसर को सील करने से पहले न तो कोई नोटिस जारी किया और न ही याचिकाकर्ता को सुनने का अवसर दिया।
याचिका में मांग की गई है कि:
* संपत्ति की सील तुरंत हटाई जाए।
* याचिकाकर्ता को निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति मिले।
* परिसर का उपयोग विधि सम्मत तरीके से पूजा-अर्चना के लिए करने दिया जाए।
अगली कार्रवाई:
हाईकोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि वे राज्य सरकार से विशेष निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई तक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करें।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार को उन कानूनी प्रावधानों को सामने रखना होगा जो ऐसी कार्रवाई की अनुमति देते हैं।
यह मामला धार्मिक स्थलों के निर्माण और प्रशासनिक नियंत्रण की कानूनी सीमाओं को तय करने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Channel Bulletin & Group Bulletin
- इलाहाबाद हाईकोर्ट से गैंगस्टर केस में परिवार को बड़ी राहत, गाजियाबाद के पूर्व पुलिस कमिश्नर को लगाई फटकार - June 7, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के आरोपी मौलाना तौकीर रज़ा खान की जमानत अर्जी की खारिज - June 5, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट: प्रशासनिक अधिकारी अनिश्चितकालीन जांच या संदेह के आधार पर धर्म परिवर्तन को बाधित नहीं कर सकते - May 30, 2026




