साक्ष्य के अभाव में पति की हत्या की आरोपी पत्नी और प्रेमी बरी: एडीजे कोर्ट का बड़ा फैसला

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

थाना निबोहरा क्षेत्र के चर्चित ‘लीलाधर हत्याकांड’ में न्यायालय ने अपना महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-14) माननीय ज्योत्स्ना सिंह ने पति की हत्या के आरोप में जेल में निरुद्ध पत्नी सोनिया उर्फ सुनीता और उसके कथित प्रेमी भोला उर्फ भोलाराम को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त (बरी) करने के आदेश दिए हैं।

घटना का संक्षिप्त विवरण:

मामला 28 सितंबर 2023 की देर रात्रि का है। वादी लेखराज (निवासी ग्राम पछाय, निबोहरा) के अनुसार, उसके छोटे भाई लीलाधर की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या कर दी गई थी।

* शुरुआती कार्रवाई: घटना के वक्त अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था।

* पुलिस का आरोप: पुलिस ने विवेचना के बाद दावा किया कि मृतक की पत्नी सोनिया के भोला नामक युवक से अवैध संबंध थे। इसी रंजिश में सोनिया ने प्रेमी के साथ मिलकर सोते हुए पति की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी।

* अदालती कार्यवाही: पुलिस ने दोनों के विरुद्ध आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया और अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 8 गवाह पेश किए गए।

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बरी होने के मुख्य आधार:

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं अरुण पचोरी, आयुष गौड़ और विनोद कुमार ने अदालत में प्रभावी तर्क रखे, जिन्हें स्वीकार करते हुए न्यायालय ने पाया कि:

* टूटी हुई कड़ियाँ: यह मामला पूरी तरह ‘परिस्थितिजन्य साक्ष्य’ (Circumstantial Evidence) पर आधारित था, लेकिन अभियोजन पक्ष घटनाओं की कड़ियों को आपस में जोड़ने में विफल रहा।

* बरामदगी पर सवाल: आरोपियों के पास से हत्या में प्रयुक्त हथियार (आला-ए-कत्ल) की बरामदगी संदेह के घेरे में रही और विधिक रूप से सिद्ध नहीं हो सकी।

* गवाहों के बयान: अदालत ने माना कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि अपराध निस्संदेह प्रमाणित न हो।

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न्यायालय का निर्णय:

न्यायाधीश माननीय ज्योत्स्ना सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के विरुद्ध ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा है।

संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए न्यायालय ने श्रीमती सोनिया और भोला राम को तत्काल रिहा करने के आदेश जारी किए।

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विवेक कुमार जैन
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