आगरा, 11 मार्च 2026।
आगरा की एक सत्र अदालत ने कार चोरी के आरोपी रिजवान जियाउल्लाह खान को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
अपर सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-08) माननीय संजय के. लाल ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्त की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला थाना लोहामण्डी, आगरा का है, जहाँ वादी पुलकित बंसल ने 19 फरवरी 2026 को तहरीर दी थी कि उनके घर के बाहर खड़ी सफेद रंग की Toyota Fortuner (UP80 EN 0700) अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर ली गई है।
पुलिस ने इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था:
* धारा 303(2): चोरी
* धारा 317(2): चुराई गई संपत्ति का कब्ज़ा
* धारा 112(2): आपराधिक षड्यंत्र/सहायता से संबंधित

बचाव और अभियोजन पक्ष के तर्क:
* बचाव पक्ष: अभियुक्त के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि रिजवान निर्दोष है और उसे पुलिस ने केवल “गुडवर्क” दिखाने के लिए झूठा फंसाया है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर अज्ञात के खिलाफ थी और बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है।
* अभियोजन पक्ष: सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और चोरी की कार अभियुक्त के कब्जे से बरामद हुई है।
न्यायालय का निर्णय:
अदालत ने अपने आदेश में नोट किया कि अभियुक्त 20 फरवरी 2026 से जेल में निरुद्ध है और यह मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
साक्ष्यों के अवलोकन के बाद, अदालत ने अभियुक्त को 2,00,000/- रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि के दो स्थानीय प्रतिभूतियों (श्योरिटी) पर जमानत दे दी।
जमानत की शर्तें:
अदालत ने रिहाई के लिए कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं:
* अभियुक्त विवेचना और विचारण में पूरा सहयोग करेगा।
* वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और न ही साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करेगा।
* प्रत्येक नियत तिथि पर न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगा।
शर्तों का उल्लंघन होने पर न्यायालय जमानत निरस्त करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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