आगरा।
फतेहाबाद क्षेत्र में बिना नाम और बिना लाइसेंस वाली दुकान से दवाएं बेचने के आरोपी जय प्रकाश को न्यायालय से राहत मिल गई है।
विशेष न्यायाधीश माननीय विवेक कुमार की अदालत ने आरोपी द्वारा प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए उसे रिहा करने के आदेश दिए हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर ने की थी कार्रवाई:
मामला 26 मई 2023 का है, जब औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) ने एक गोपनीय सूचना के आधार पर फतेहाबाद-बाह बाईपास रोड स्थित एक बाजार में छापेमारी की थी।
वहां बिना किसी नाम के एक दुकान संचालित हो रही थी, जिसके पास दवाओं की बिक्री के लिए वैध लाइसेंस नहीं था। इस मामले में पुलिस ने रसूलपुर निवासी जय प्रकाश पुत्र रनवीर सिंह के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत परिवाद दर्ज कराया था।
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अदालत में बचाव पक्ष के तर्क:
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता राजेश कुमार चित्तौड़ ने अदालत के सामने मजबूत पक्ष रखते हुए निम्नलिखित तर्क दिए:
* पारिवारिक पृष्ठभूमि: आरोपी और उसके पिता, दोनों ही पेशेवर फार्मासिस्ट हैं।
* लाइसेंस की स्थिति: वर्ष 2023 में तकनीकी कारणों से उनका लाइसेंस निरस्त हो गया था, जिसके बाद उन्होंने पुन: लाइसेंस प्राप्त करने के लिए विभाग में आवेदन कर दिया था।
* दवाओं की गुणवत्ता: जांच के दौरान बरामद की गई सभी दवाएं मानक के अनुरूप और पूर्णतया सही पाई गईं, यानी कोई भी दवा नकली या मिलावटी नहीं थी।
* स्वतंत्र गवाह का अभाव: पुलिस और ड्रग विभाग की इस बरामदगी की पुष्टि करने वाला कोई भी स्वतंत्र गवाह मौके पर नहीं दर्शाया गया था।
न्यायालय का निर्णय:
विशेष न्यायाधीश माननीय विवेक कुमार ने अधिवक्ता के तर्कों और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी जय प्रकाश की जमानत याचिका मंजूर कर ली और उसे कारागार से रिहा करने का आदेश दिया।
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