वादी और मुख्य गवाह के मुकरने पर कोर्ट ने सुनाया फैसला
30 साल पहले टेम्पू किराये को लेकर हुआ था विवाद
आगरा।
जनपद के थाना शाहगंज क्षेत्र में तीन दशक पूर्व हुए पथराव, मारपीट और धमकी के मामले में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह ने दो सगे भाइयों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
इस मामले में वादी और उसकी बहन (मुख्य गवाह) अदालत में अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश जारी किया।
क्या था मामला ?
मामला 24 अप्रैल 1996 का है। वादी शहजाद खां के अनुसार, उसके भाई नवाब ने शाम करीब 5:45 बजे आरोपी गुड्डू के ऑटो से खेरिया मोड़ जाने के लिए किराया पूछा था।
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ज्यादा किराया बताने पर विवाद शुरू हुआ, जिसमें आरोप था कि गुड्डू, उसके भाई बबलू और आजाद उर्फ टोंटा (निवासी तेलीपाड़ा) ने गाली-गलौज की।
विरोध करने पर आरोपियों ने पथराव किया और लाठी-डंडों से नवाब व बीच-बचाव करने आए शहजाद के साथ मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी।
30 साल चला विचारण:
इस लंबे चले मुकदमे के दौरान एक आरोपी आजाद उर्फ टोंटा की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। शेष दो भाइयों गुड्डू और बबलू के खिलाफ विचारण जारी रहा।
गवाहों के मुकरने से टूटा केस:
अदालत में अभियोजन की ओर से केवल वादी और उसकी बहन श्रीमती जमीला की गवाही दर्ज हुई। अन्य कोई गवाह पेश नहीं किया जा सका।
सुनवाई के दौरान वादी और उसकी बहन अपने पिछले बयानों से मुकर गए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता पीयूष सागर के तर्कों और साक्ष्यों की कमी को देखते हुए, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने घटना के 30 साल बाद दोनों भाइयों को दोषमुक्त करने का आदेश दिया।
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