आगरा के थाना शाहगंज क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) कोर्ट संख्या 15 माननीय राजीव कुमार पालीवाल ने साक्ष्य के अभाव में पति, सास और देवर को हत्या तथा सबूत नष्ट करने के आरोपों से बरी कर दिया है।
वादी मुकदमा गंगा सिंह ने अपनी पुत्री शिवानी की शादी 16 अप्रैल 2016 को आगरा के थाना शाहगंज अंतर्गत ग्राम पथोली निवासी पुष्कर सिंह के साथ की थी।
वादी के अनुसार 20 नवंबर 2018 की रात को उसकी पुत्री अचानक गायब हो गई थी। इसके बाद वादी ने दहेज उत्पीड़न और हत्या की आशंका जताते हुए पति पुष्कर सिंह, सास गायत्री देवी और पुष्कर के ममेरे भाई वीरेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
मुकदमा दर्ज होने के कुछ दिनों बाद, 7 दिसंबर 2018 को किरावली स्थित लेदर पार्क के पास पुलिया के नीचे एक महिला का कंकाल बरामद हुआ था, जिसकी शिनाख्त वादी की पुत्री के रूप में की गई थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मृतका के पिता गंगा सिंह और माता नारायणी सहित कुल 10 गवाह अदालत में पेश किए गए।
अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुरेश चंद गौतम ने अपने तर्क रखे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने पाया कि मामले में प्रस्तुत किए गए परिस्थिजन्य साक्ष्य की कड़ियां आपस में पूरी तरह नहीं जुड़ पा रही हैं।
अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में असफल रहा, जिसके आधार पर न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए पति पुष्कर सिंह, सास गायत्री देवी और वीरेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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