शिकायतकर्ता के पति की पुलिस अधिकारियों ने हिरासत में न होने के बावजूद की थी पिटाई
आगरा/नई दिल्ली ३० मई ।
दिल्ली छावनी थाने के एक चौंकाने वाले मामले में, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग की अदालत ने तत्कालीन एसएचओ विद्याधर सिंह, तत्कालीन हेड कांस्टेबल राजपाल और तत्कालीन हेड कांस्टेबल महिंदर को धारा 354/506(1)/325 आईपीसी के तहत समन जारी किए हैं। यह आदेश यशोदा बनाम राज्य के मामले (सीटी केस 185/2020) में 21 मई, 2025 को पारित किया गया।
शिकायतकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता विपिन राठी ने अदालत को सूचित किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के “प्यारे लाल और अन्य बनाम सीता राम मैमगोई और अन्य” (1986 एससीसी ऑनलाइन डेल-285) के फैसले के अनुसार, पुलिस अधिकारी द्वारा दुर्व्यवहार या मारपीट जैसी अमानवीय हरकतें उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़ी नहीं हो सकतीं।
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मामले में यह आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता के पति को पुलिस अधिकारियों ने हिरासत में न होने के बावजूद पीटा था। पीड़ित का एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) रिकॉर्ड में भी मौजूद है। अदालत ने शिकायतकर्ता के वकील की दलीलों पर संतुष्टि व्यक्त की, यह मानते हुए कि प्रस्तावित अभियुक्तों को समन करने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
इस मामले में बहस पहले ही 09 जनवरी, 2025 को सुनी जा चुकी थी। अब अदालत ने प्रस्तावित अभियुक्तों को आज से दो सप्ताह के भीतर पीएफ/आरसी (प्रोसेस फीस/रिटर्न ऑफ सर्विस) दाखिल करने के लिए समन जारी करने का आदेश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त, 2025 को होगी।
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