आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को सेवा में कमी का दोषी पाया है।
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह मृतक पॉलिसीधारक के कानूनी उत्तराधिकारियों को 3,00,000/- रुपये की बीमा धनराशि 6% ब्याज के साथ अदा करे।
इसके साथ ही, मानसिक पीड़ा के लिए 20,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 10,000/- रुपये देने का भी आदेश दिया गया है।
क्या था मामला ?
ग्राम दूरा, किरावली निवासी नवल सिंह ने 3 फरवरी 2022 को एलआईसी से 3 लाख रुपये की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी लेने के मात्र 11 दिन बाद, 14 फरवरी 2022 को उनकी अचानक मृत्यु हो गई।
जब उनकी पत्नी मीना (नॉमनी) ने बीमा क्लेम पेश किया, तो कंपनी ने इसे यह कहते हुए टाल दिया कि मृत्यु पॉलिसी लेने के मात्र 6 दिन (प्रपोजल से) के भीतर हुई है, जो ‘अर्ली क्लेम’ (Early Claim) की श्रेणी में आता है। बीमा कंपनी ने आरोप लगाया कि मृतक ने अपनी पुरानी बीमारी को छिपाकर पॉलिसी ली थी।
आयोग की सख्त टिप्पणी:
सुनवाई के दौरान, अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने पाया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसीधारक की किसी भी ‘पुरानी बीमारी’ का कोई ठोस दस्तावेजी या मेडिकल साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि:
* सबूत का भार: यह साबित करना बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि पॉलिसीधारक ने कौन सी बीमारी छिपाई थी।
* महज आरोप काफी नहीं: केवल लिखित कथन में बीमारी की बात कह देने से उसे सच नहीं माना जा सकता। कंपनी को इलाज के पर्चे या अस्पताल में भर्ती होने के सबूत देने चाहिए थे।
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* सुप्रीम कोर्ट का हवाला: आयोग ने पी. वेंकट नायडू बनाम एलआईसी और मनमोहन नंदा बनाम यूनाइटेड इंडिया एश्योरेंस मामलों का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि कंपनी ने मेडिकल रिकॉर्ड जांचने के बाद पॉलिसी जारी की है, तो वह बाद में बीमारी का बहाना बनाकर क्लेम नहीं रोक सकती।
अदालत का आदेश:
आयोग ने परिवाद स्वीकार करते हुए निम्नलिखित आदेश दिए:
* बीमा राशि: 3,00,000/- रुपये की पूरी राशि, परिवाद दाखिल करने की तिथि से भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ।
* क्षतिपूर्ति: मानसिक उत्पीड़न के लिए 20,000/- रुपये।
* वाद व्यय: कानूनी खर्च के लिए 10,000/- रुपये।
* डेडलाइन: यह भुगतान 45 दिन के भीतर करना होगा। देरी होने पर ब्याज की दर 9% वार्षिक कर दी जाएगी।
चूंकि वाद के दौरान मूल परिवादिनी मीना देवी की भी मृत्यु हो गई थी, इसलिए अब यह राशि उनके पुत्रों (बलवंत सिंह, मनोज कुमार और अंकित) को प्राप्त होगी।
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