आगरा/चंडीगढ़ 24 मार्च ।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से प्रत्येक जिले में जिला मजिस्ट्रेट के प्रभार में तथा राज्य स्तर पर ट्रांसजेंडर सुरक्षा प्रकोष्ठों की स्थापना के बारे में अवगत कराने को कहा।
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 के नियम 11 में कहा गया कि प्रत्येक राज्य सरकार प्रत्येक जिले में जिला मजिस्ट्रेट के प्रभार में तथा राज्य में पुलिस महानिदेशक के अधीन एक ट्रांसजेंडर सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना करेगी, जिससे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के विरुद्ध अपराधों के मामलों की निगरानी की जा सके तथा ऐसे अपराधों का समय पर पंजीकरण, जांच तथा अभियोजन सुनिश्चित किया जा सके।
चीफ जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस सुमित गोयल की खंडपीठ ने यह भी कहा,
“पंजाब राज्य के वकील को निर्देश दिया जाता है कि वे जेलों तथा पुलिस थानों में पुरुष तथा महिला ट्रांसजेंडर अभियुक्तों के लिए कोई अलग प्रकोष्ठ आवंटित न होने के संबंध में इस न्यायालय को अवगत कराएं। अगली सुनवाई की तिथि को या उससे पहले हलफनामा दाखिल किया जाए।”
पेशे से वकील सनप्रीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि ट्रांसजेंडर को थर्ड जेंडर के रूप में पहचाना जाता है। इसलिए जेलों के अंदर अलग-अलग सेल/वार्ड/बैरक और शौचालय बनाए जाने चाहिए। साथ ही प्रत्येक पुलिस स्टेशन में अलग-अलग लॉकअप भी होने चाहिए, जिससे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को किसी भी तरह के मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न से बचाया जा सके, जैसा कि नालसा बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर किया गया है।

पटना हाईकोर्ट के लॉ फाउंडेशन बनाम बिहार राज्य और अन्य [2022 लाइव लॉ (पैट) 34] के फैसले पर भी भरोसा किया गया, जिसमें कहा गया कि न्यायालय ने बिहार की सभी जेलों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग वार्ड और सेल बनाने का निर्देश दिया था।
इसमें कहा गया कि ट्रांसजेंडर कैदियों की गवाही का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि जेल हिरासत संस्थान हैं, जहां पुरुषों द्वारा स्त्रैण व्यवहार हमेशा अधिकारियों और कैदियों दोनों द्वारा दुर्व्यवहार का अधिक जोखिम होता है। इसलिए ट्रांसजेंडर व्यक्ति जेलों के अंदर “यौन हिंसा के सबसे क्रूर रूपों” का शिकार बनते हैं।
याचिकाकर्ता ने “जेल या पुलिस स्टेशन लॉकअप में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के प्रवेश से पहले उनके जेंडर की पहचान के लिए तंत्र विकसित करने” के लिए निर्देश भी मांगे।
न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में पंजाब के जेल उप-महानिरीक्षक द्वारा एक हलफनामा दायर किया गया, जिसमें खुलासा हुआ कि 24 जनवरी के पत्र के माध्यम से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने पंजाब के सभी जेल अधीक्षकों को पुरुष और महिला ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए एक अलग सेल बनाने के निर्देश जारी किए।
मामले को आगे के विचार के लिए 19 मई तक के लिए टाल दिया गया।
केस टाइटल: सनप्रीत सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य
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साभार: लाइव लॉ
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