आगरा:
तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के चलते अपने ही सात वर्षीय मासूम बेटे की कैंची से गोदकर निर्मम हत्या करने वाले कलयुगी पिता को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है।
एडीजे 29 माननीय दिनेश कुमार चौरसिया ने आरोपी पिता अमित को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
खास बात यह रही कि परिवार के सदस्यों के गवाही से मुकरने के बावजूद अदालत ने पुलिस साक्ष्यों और मामले की जघन्यता को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
जानिये क्या था रूह कंपा देने वाला मामला ?
घटना 10 अगस्त 2019 की है। थाना ताजगंज के महादेव नगर (शमशाबाद रोड) निवासी आरोपी अमित घर में पूजा-पाठ और तंत्र-मंत्र करता था। वह अक्सर कहता था कि उसका बड़ा बेटा ऋषि (7 वर्ष) रावण के रूप में पैदा हुआ है और उसका अंत करना परिवार के लिए सही होगा।
घटना के दिन अमित अपने पुत्र ऋषि को स्कूल छोड़ने के बहाने घर से ले गया। शक होने पर जब उसकी मां (बच्चे की दादी) पीछे गई, तो पता चला कि वह स्कूल पहुंचा ही नहीं।
तलाश करने पर ऋषि का शव एक दुकान के बेसमेंट में मिला। मासूम बच्चा स्कूल की ड्रेस पहने हुए था और कंधे पर बैग टंगा था। अमित ने घर से ले जाई गई कैंची से उस पर ताबड़तोड़ प्रहार कर उसकी जान ले ली थी।
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बाबा, दादी और मां गवाही से मुकरे:
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मुकदमे की पैरवी के दौरान मृतक ऋषि के बाबा (वादी मुकदमा राम प्रताप सिंह), दादी और मां अदालत में अपने बयानों से मुकर गए। तीनों ने आरोपी अमित के पक्ष में गवाही दी।
हालांकि, न्यायाधीश ने इसे खारिज करते हुए टिप्पणी की कि
“कोई भी पिता अपने पुत्र के विरुद्ध तब तक झूठा मुकदमा दर्ज नहीं कराएगा जब तक घटना में सत्यता न हो। पुलिस को दिए गए शुरुआती बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी के जघन्य कृत्य को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।”
तांत्रिक को मिली रिहाई:
पुलिस ने विवेचना के दौरान अमित के मोबाइल से दिल्ली निवासी कथित तांत्रिक गुरुप्रीत सिंह का नंबर मिलने पर उसे भी गिरफ्तार किया था।
हालांकि, अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा ने दलील दी कि घटना के दिन गुरुप्रीत की लोकेशन दिल्ली में थी और पुलिस उसके तांत्रिक होने के ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने गुरुप्रीत सिंह को बरी कर दिया।
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फैसले के मुख्य बिंदु:
* सजा: आरोपी अमित को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना।
* अपराध: सगे पुत्र की हत्या, साक्ष्य नष्ट करना और आपराधिक षड्यंत्र।
* बचाव: परिजनों ने आरोपी को बचाने का प्रयास किया, लेकिन अदालत ने न्याय को प्राथमिकता दी।
* पैरवी: अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मोहकम सिंह ने प्रभावी पैरवी की।
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