आगरा ।
योगेश्वर श्रीकृष्ण संस्कृति अनुसंधान संस्थान ट्रस्ट द्वारा दायर कामाख्या माता मंदिर से जुड़े मामले (केस संख्या- 113/2024, श्री भगवान श्री कामाख्या माता आदि बनाम सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड आदि) की सुनवाई माननीय सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-8 के न्यायालय में संपन्न हुई।
न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 39 नियम 1 व 2 के तहत एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से विवादित संपत्ति में किसी भी प्रकार के निर्माण, बदलाव या तोड़फोड़ को रोकने के लिए न्यायालय से अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई है।
वादी अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष यह तर्क दिया कि हाल ही में समाचार पत्रों के माध्यम से यह जानकारी मिली है कि कथित सलीम चिश्ती दरगाह परिसर में सज्जादानशीन रईस मियां को दफनाया गया है।

वादी पक्ष का कहना है कि यह विवादित संपत्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन राष्ट्रीय महत्व का एक संरक्षित स्मारक है, जिसमें किसी भी प्रकार का बनाव-बिगाड़ या निर्माण करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
वादी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि विपक्षीगणों ने दफनाने की प्रक्रिया की आड़ में विवादित संपत्ति में मौजूद मंदिर से संबंधित प्राचीन निशानों के साथ छेड़छाड़ की है।
याचिका के अनुसार, यह स्थान सिकरवार समाज की कुलदेवी कामाख्या माता का मंदिर है और यहां इस प्रकार की गतिविधियां मंदिर की मूल प्रकृति और स्वरूप के विरुद्ध हैं।
न्यायालय अब इस मामले और अस्थायी निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र पर 1 अगस्त को आगे की सुनवाई करेगा।
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