आगरा, १४ जुलाई ।
आगरा के सदर थाना क्षेत्र के बीच का उखर्रा गांव में 16 साल पहले हुई एक महिला की मौत के मामले में अपर जिला जज-प्रथम माननीय राजेंद्र प्रसाद ने साक्ष्य के अभाव में चार आरोपियों- संजू, सुरेश, मुकेश और मुरारी (पुत्रगण राम प्रसाद) को बरी कर दिया है। इन पर महिला को आत्महत्या के लिए विवश करने का आरोप था।
क्या था मामला ?
यह मामला 21 मई 2008 का है, जब वादी रमेश चंद (मृतका सोन देवी के पति) ने थाना सदर में शिकायत दर्ज कराई थी। रमेश चंद ने आरोप लगाया था कि सुबह करीब 10 बजे उनकी पत्नी सोन देवी, आरोपियों द्वारा बनाई जा रही एक दीवार का विरोध करने उनके घर गई थीं।
वहां आरोपियों ने कथित तौर पर उन पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। रमेश चंद के भाई और अन्य परिजनों ने आग बुझाई और सोन देवी को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
प्रारंभ में रमेश चंद की तहरीर पर आरोपी भाइयों, उनकी मां श्रीमती सामंती देवी, और आरोपियों की पत्नियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
सोन देवी की मृत्यु के बाद, मुकदमे को हत्या के आरोप में बदल दिया गया। हालांकि, विवेचना के दौरान इस मामले को ‘आत्महत्या के लिए विवश करने’ की धारा में बदल दिया गया और विवेचक ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
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बरी होने के कारण:
इस मामले में कई महत्वपूर्ण मोड़ आए, जिनके कारण आरोपियों को बरी किया गया:
* मृत्यु पूर्व बयान: मृतका श्रीमती सोन देवी ने अपने मृत्यु पूर्व बयान में आरोपियों के खिलाफ घटना की पुष्टि की थी।
* मृत्यु: मुकदमे के विचारण के दौरान अभियुक्ता श्रीमती सामंती देवी (आरोपियों की मां) की मृत्यु हो गई, जिसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी। वादी मुकदमा रमेश चंद (मृतका के पति) की भी गवाही दर्ज होने से पहले ही मृत्यु हो गई।
* गवाहों का समर्थन नहीं: अभियोजन पक्ष की ओर से मृतका के देवर तारा चंद, देवरानी श्रीमती प्रेम देवी, पुत्री रेखा, भतीजे महेश सहित दस गवाहों को अदालत में पेश किया गया। हालांकि, इन सभी गवाहों ने घटना का समर्थन नहीं किया।
* विवेचक का बयान: विवेचक बलधारी सिंह ने अपने बयान में बताया कि गांव के कई व्यक्तियों ने सीओ सदर के माध्यम से शपथ पत्र प्रस्तुत कर कहा था कि दीवार बनाने को लेकर हुए झगड़े के बाद मृतका ने अभियुक्तों को फंसाने की धमकी दी थी और स्वयं अपने घर जाकर अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर माचिस से आग लगा ली थी। मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था।
* परिजनों की स्वीकारोक्ति: मृतका के परिजनों ने भी स्वीकार किया कि मृत्यु पूर्व बयान मृतका द्वारा अपने पति (वादी मुकदमा) के कहने पर ही आरोपियों के खिलाफ दिया गया था।
इन सभी कारणों और आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ता करतार सिंह भारतीय और नरेंद्र कुमार यादव के तर्कों को सुनने के बाद, अदालत ने साक्ष्य के अभाव में संजू, सुरेश, मुकेश और मुरारी को बरी करने का आदेश दिया।
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