आगरा की विशेष पॉक्सो अदालत ने न्यायालय कक्ष में उपेक्षापूर्ण और अमर्यादित आचरण करने के मामले में सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) छत्ता, श्वेता वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
अदालत ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 384 के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
* यह मामला थाना ट्रांस यमुना, आगरा का है, जहां आरोपी अर्पित बघेल के खिलाफ दुराचार, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा (अपराध संख्या 203/2026) दर्ज है।
* विवेचना के क्रम में यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता करीब 33 सप्ताह 10 दिन की गर्भवती है।
* मामले की विवेचक एसीपी श्वेता वर्मा ने आरोपी और भ्रूण का डीएनए परीक्षण कराने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।
* अदालत ने माननीय उच्चतम न्यायालय के सेल्वी बनाम स्टेट ऑफ कर्नाटक और रोहित शेखर बनाम एन.डी. तिवारी मामलों का हवाला देते हुए डीएनए परीक्षण की अनुमति दे दी थी।
अदालत में क्या हुआ ?
आदेश के बावजूद डीएनए परीक्षण की कार्यवाही में देरी हुई, जिसको लेकर अदालत ने विवेचक को तलब किया था।

16 जुलाई 2026 को जब विवेचक श्वेता वर्मा अदालत में उपस्थित हुईं और न्यायालय द्वारा सामान्य अनुक्रम में उनसे देरी का कारण पूछा गया, तो उनका व्यवहार न्यायालय की गरिमा के प्रतिकूल रहा।
अदालत के आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार:
* विवेचक ने अपमानजनक तौर पर कहा, “हमें और भी काम रहता है आपने हमें बुला लिया”।
* जब न्यायालय ने विवेचक को सचेत किया कि यह पॉक्सो अधिनियम का अत्यंत गंभीर और संवेदनशील प्रकरण है, तो विवेचक ने अत्यंत अशिष्टपूर्ण और अहंकारपूर्ण तरीके से टिप्पणी की कि “हम करा लेंगे डी.एन.ए”।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन और अदालत की टिप्पणी:
विशेष न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि विवेचक पुलिस वेशभूषा में न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुई थीं।
पुलिस विभाग का सदस्य होने के बावजूद उन्होंने स्थापित पुलिस प्रोटोकॉल के अनुसार न्यायालय को न तो कोई औपचारिक अभिवादन किया और न ही कोई सम्मान प्रदर्शित किया। अदालत ने इसे न्यायिक संस्था के प्रति स्पष्ट तौर पर अनादर की भावना माना है।
न्यायालय ने विवेचक के इस कृत्य को प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 267 के अंतर्गत परिभाषित एवं दंडनीय अपराध की श्रेणी में पाया है।
अदालत के निर्देश
* न्यायालय ने विवेचक एसीपी श्वेता वर्मा को निर्देशित किया है कि वह 24 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
* उन्हें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि न्यायालय की अवमानना तथा धारा 267 के अंतर्गत अपराध कारित किए जाने के लिए उन्हें क्यों न दंडित किया जाए ?
* अदालत ने इस आदेश की प्रति पुलिस कमिश्नर, आगरा को सूचनार्थ प्रेषित की है।
* पुलिस कमिश्नर से यह अपेक्षा की गई है कि पॉक्सो अधिनियम की संवेदनशीलता को देखते हुए इस प्रकरण की विवेचना किसी वरिष्ठ अधिकारी के पर्यवेक्षण में कराई जाए।
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