झूठी गवाही पर अदालत सख्त: लूट का आरोपी बरी, वादी के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही के आदेश

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आगरा।

विशेष न्यायाधीश (दस्यू प्रभावी क्षेत्र) माननीय विकास गोयल की अदालत ने लूट और माल बरामदगी के एक मामले में आरोपी मनोज यादव को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

इसके साथ ही, अदालत ने मामले के वादी द्वारा अपनी पूर्व की गवाही से मुकर जाने पर उसके विरुद्ध ही विधिक कार्यवाही करने के आदेश जारी किए हैं।

क्या था मामला ?

अभियोजन के अनुसार, थाना जगदीशपुरा में दर्ज मामले में वादी इकरार ने आरोप लगाया था कि 21 जनवरी 2014 की रात करीब 9:30 बजे वह ट्रक में जयपुर से तूरी भरकर मुरादाबाद ले जा रहा था।

ग्राम मघटई के पास मोटरसाइकिल सवार दो व्यक्तियों ने उसे रोका। आरोप था कि उन व्यक्तियों ने नगर पालिका की 100/- रुपये की रसीद थमाकर जबरन एक हजार रुपये मांगे। विरोध करने पर वादी के साथ मारपीट की गई और उसकी जेब से 1550/- रुपये लूट लिए गए।

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पकड़ा गया था आरोपी:

घटना के समय वादी और क्लीनर के शोर मचाने पर भीड़ जमा हो गई थी, जिसकी मदद से आरोपी मनोज यादव (निवासी एटा) को मौके पर ही पकड़ लिया गया था।

पुलिस का दावा था कि मनोज के पास से लूटे गए 1550/- रुपये भी बरामद हुए थे, जबकि उसका दूसरा साथी भागने में सफल रहा था।

अदालत का रुख और फैसला:

मामले के विचारण के दौरान केवल दो गवाहों, वादी इकरार और सब-इंस्पेक्टर कृष्ण पाल सिंह के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान वादी इकरार अपनी ही दर्ज कराई गई कहानी और पहचान से मुकर गया।

आरोपी के वरिष्ठ अधिवक्ता राम प्रकाश शर्मा ने तर्क दिया कि जब मुख्य गवाह ही घटना का समर्थन नहीं कर रहा है, तो आरोपी को सजा नहीं दी जा सकती।

न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी मनोज यादव को दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया कि वादी ने पहले गंभीर आरोप लगाए और बाद में मुकर गया।

इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए न्यायालय ने वादी इकरार के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।

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विवेक कुमार जैन
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