आगरा:
दो जूता व्यवसायी फर्मों के बीच लाखों रुपये के लेनदेन से जुड़े एक मामले में, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-4) माननीय प्रगति सिंह की अदालत ने लंबित आपराधिक वाद को सिविल प्रकृति का मानते हुए उसे निरस्त करने का आदेश दिया है।
ट्रेला फुटवियर एक्सपोर्ट ने किया था मुकदमा:
मामले के अनुसार, मे. ट्रेला फुटवियर एक्सपोर्ट प्रा. लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि ने अदालत में एक परिवाद दायर किया था। वादी फर्म के डायरेक्टर हर्ष कुमार सचदेवा ने आरोप लगाया था कि उनकी फर्म (जो जूतों के सोल का निर्माण और विक्रय करती है) ने विपक्षी फर्म मैसर्स डरवी फुटवियर एक्सपोर्ट (प्रो. जितेंद्र त्रिलोकानी) को कुल ₹28,59,320/- रुपये का माल सप्लाई किया था।

वादी का आरोप था कि विपक्षी फर्म ने माल का एक बड़ा हिस्सा लिया, लेकिन उसमें से ₹12,23,912/- रुपये का बकाया भुगतान रोक लिया। वादी ने यह भी आरोप लगाया था कि बार-बार तकादा करने पर भी भुगतान नहीं किया गया और उलटे विपक्षी द्वारा गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।
वादी ने धोखाधड़ी एवं अन्य संबंधित धाराओं में परिवाद प्रस्तुत कर विपक्षी को मुकदमे के विचारण हेतु तलब करने का आग्रह किया था।
अदालत ने माना ‘सिविल प्रकृति का विवाद’:
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-4 माननीय प्रगति सिंह ने इस मामले की सुनवाई की। विपक्षी मैसर्स डरवी फुटवियर एक्सपोर्ट की ओर से अधिवक्ता बलवीर सिंह धाकरे एवं उत्कर्ष मुड़ोतिया ने अदालत के समक्ष तर्क प्रस्तुत किए।
अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद, इस पूरे विवाद को रुपये के लेनदेन और बकाया वसूली से संबंधित मानते हुए, इसे सिविल प्रकृति का माना।
तदनुसार, अदालत ने आपराधिक वाद को निरस्त (खारिज) करने का महत्वपूर्ण आदेश दिया।
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