आगरा में नौकरी के नाम पर अपनों से ही लाखों की ठगी करने के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत याचिका खारिज

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आगरा।

एफसीआई (FCI) और पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगवाने के नाम पर अपने ही रिश्तेदारों से 11 लाख 20 हजार रुपये की ठगी करने वाले पिता-पुत्र को अदालत से बड़ा झटका लगा है।

एडीजे प्रथम माननीय पुष्कर उपाध्याय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पिता रनवीर सिंह और उसके पुत्र प्रमोद कुमार की जमानत याचिका निरस्त करने के आदेश दिए हैं।

रिश्तेदारी का फायदा उठाकर बुना ठगी का जाल:

थाना मलपुरा में दर्ज मुकदमे के अनुसार, वादी रमेश चंद ने आरोप लगाया था कि मई 2020 में उनके रिश्तेदार रनवीर सिंह और उनका बेटा प्रमोद (निवासी बर का नगला, मगोर्रा, मथुरा) उनके घर आए थे।

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बातों-बातों में आरोपियों ने झांसा दिया कि प्रमोद एफसीआई में इंस्पेक्टर है और उसका दोस्त पोस्ट ऑफिस में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात है।

आरोपियों ने वादी के पुत्र रवी कुमार को एफसीआई में और दामाद कृपाल सिंह को पोस्ट ऑफिस में सरकारी नौकरी लगवाने का लालच दिया।

फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर हड़पे लाखों रुपये:

आरोप है कि जून 2020 में आरोपियों ने वादी से एडवांस के तौर पर दो लाख रुपये लिए। इसके बाद विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने फर्जी जॉइनिंग लेटर भी थमा दिए।

जॉइनिंग लेटर और नौकरी के नाम पर आरोपियों ने वादी और उनके दामाद से किश्तों में कुल 11 लाख 20 हजार रुपये हड़प लिए। ठगी का अहसास होने पर वादी ने पुलिस की शरण ली।

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अदालत ने माना गंभीर अपराध:

जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आदर्श चौधरी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों ने शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और धोखाधड़ी कर बड़ी रकम हड़पी है।

अदालत ने अभियोजन के तर्कों और मामले की प्रकृति को देखते हुए पिता-पुत्र को राहत देने से इंकार कर दिया और उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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विवेक कुमार जैन
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