दलित उत्पीड़न और घातक हमले के मामले में महिला अभियुक्ता की जमानत मंजूर

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

दलित उत्पीड़न (SC/ST Act), घातक चोट पहुँचाने और अन्य गंभीर धाराओं में आरोपित एक महिला अभियुक्ता की जमानत अर्जी को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।

एडीजे-1 माननीय पुष्कर उपाध्याय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अभियुक्ता श्रीमती श्यामा देवी की रिहाई के आदेश जारी किए।

मामले की पृष्ठभूमि:

यह मामला थाना बाह में दर्ज कराया गया था। वादी वीरेश कुमार के अनुसार, घटना 17 मार्च 2025 की है।

* आरोप था कि आरोपी राम अवतार ने वादी की माँ के साथ अभद्रता और गाली-गलौज की थी।

* जब वादी शाम करीब 6 बजे राम अवतार की दुकान पर कारण पूछने गया, तो वहां मौजूद राम अवतार, अशोक और पवन ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसके साथ मारपीट की।

* मुख्य आरोपी राम अवतार पर कुल्हाड़ी से प्रहार कर वादी को घातक चोट पहुँचाने का भी आरोप लगाया गया था।

न्यायालय में बचाव पक्ष के तर्क:

जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान अभियुक्ता के अधिवक्ता प्रदीप रघुवंशी ने प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए:

* उन्होंने न्यायालय को बताया कि अभियुक्ता मूल एफ.आई.आर. (FIR) में नामजद नहीं थी।

* विवेचना के दौरान उनका नाम बाद में जोड़ा गया है।

* अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त घटना को अंजाम देने में महिला की कोई भूमिका नहीं थी।

न्यायालय का निर्णय:

एडीजे-1 माननीय पुष्कर उपाध्याय ने बचाव पक्ष के तर्कों और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अभियुक्ता श्यामा देवी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली और उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया।

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विवेक कुमार जैन
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