आगरा/नई दिल्ली:
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 2015 में कोलकाता में अदालत द्वारा नियुक्त वकीलों पर हमला करने के मामले में 12 लोगों को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 2,000/- रुपये का जुर्माना लगाया और उन्हें एक दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि भले ही सभी दोषियों ने बिना शर्त माफी मांग ली हो, लेकिन वकीलों पर किए गए हमले की गंभीरता, उन्हें लगी गंभीर चोटें और उनके साथ गए पुलिस अधिकारियों के घायल होने को देखते हुए सजा आवश्यक थी।
कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों में सख्त सजा नहीं दी जाती तो कानून का डर खत्म हो जाएगा, जो समाज के लिए घातक है।
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क्या था मामला ?
यह मामला 2015 का है, जब दिल्ली हाईकोर्ट को सूचना मिली कि कोलकाता में 11 वकील, जिन्हें कोर्ट ने लोकल कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया था, पर भीड़ ने हमला कर दिया। ये वकील सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा दायर एक ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में नकली सैमसंग उत्पादों की बिक्री करने वाले परिसरों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान ही उन पर हमला हुआ।
हमले के बाद एक वकील कमिश्नर ने अदालत को बताया कि उनके दाहिनी आंख और बाईं गाल पर गंभीर चोटें आईं और उनके दो दांत टूट गए। उन्होंने यह भी बताया कि बाकी कमिश्नरों को भी पीटा गया और उन्हें अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

कोर्ट की टिप्पणी:
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जिन लोगों ने जानबूझकर अदालत के आदेश के पालन में बाधा डाली, उनके खिलाफ ही यह कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो लोग केवल अनजाने में वहां मौजूद थे और जिन्हें स्थिति की जानकारी नहीं थी, उन्हें आपराधिक अवमानना के दायरे में नहीं लाया जा सकता।
खंडपीठ ने कहा,
“वकील कमिश्नरों को बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनके मन में भय बैठ गया और उन्हें अपना काम छोड़कर भागना पड़ा। इसका उद्देश्य अदालत द्वारा सौंपे गए कार्य में बाधा डालना था, जो न्याय के प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप है।”

कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसे लोगों को सख्त सजा देना इसलिए जरूरी है ताकि आम नागरिकों के बीच कानून का सम्मान बना रहे।
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