आगरा/प्रयागराज ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड के सात जिलों – झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और जालौन – में गायब हो रहे तालाबों और जलाशयों पर चिंता व्यक्त करते हुए सख्त कदम उठाए हैं।
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की एकल पीठ ने एक समाचार पत्र में छपी खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दायर की, जिसमें बताया गया था कि बुंदेलखंड क्षेत्र से लगभग 4250 तालाब गायब हो चुके हैं।
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कोर्ट ने इन सभी सात जिलों के जिलाधिकारियों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इस हलफनामे में जिलाधिकारियों को 1359 फसली से पिछले 20 साल तक का सर्वे कराकर यह बताना होगा कि उनके जिलों में कितने तालाब मौजूद हैं और कितने गायब हो गए हैं।
इसके साथ ही, उन्हें तालाबों के गायब होने के कारणों का भी खुलासा करना होगा।
न्यायमित्र (amicus curiae) के रूप में नियुक्त अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि चित्रकूट जिले के मऊ तहसील में, चकबंदी के दौरान तालाबों और भीटा की जमीन लोगों को आवंटित कर दी गई, जिसके कारण बड़ी संख्या में तालाब गायब हो गए।

कोर्ट ने जिलाधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वे कर मौजूद और गायब हो चुके तालाबों की विस्तृत जानकारी 17 सितंबर को अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत हलफनामे के साथ प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
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