गोरखपुर संप्रेक्षण गृह की दुर्व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, चीफ जस्टिस ने कायम की जनहित याचिका

उच्च न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा/प्रयागराज २२ मई ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह में व्याप्त घोर दुर्व्यवस्था का स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव के एक पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने 71 बाल अपचारियों को अमानवीय ढंग से रखे जाने की दुर्दशा को लेकर एक जनहित याचिका (पी आई एल ) कायम की है। इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई शुक्रवार, 23 मई को होगी।

न्यायमूर्ति यादव ने देवरिया से एक दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर का संज्ञान लिया था। खबर में संप्रेक्षण गृह की अमानवीय स्थितियों का विस्तृत वर्णन किया गया था।

जस्टिस यादव ने तत्परता दिखाते हुए हाईकोर्ट के महानिबंधक को पत्र लिखकर इस मामले को जनहित याचिका मानते हुए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का अनुरोध किया था।

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क्या है मामला ?

राजकीय संप्रेक्षण गृह गोरखपुर में आटे में कीड़े मिलने का गंभीर आरोप लगा है, जो वहां परोसने वाले भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि 100 बालकों की क्षमता वाले इस संप्रेक्षण गृह में गोरखपुर मंडल के विभिन्न जिलों से आए 257 बालक रह रहे हैं, जिससे अत्यधिक भीड़भाड़ और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं।

इस भयावह अव्यवस्था का खुलासा तब हुआ जब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देवरिया के सचिव और अपर जिला जज ने संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया। उनकी रिपोर्ट ने इन अमानवीय स्थितियों को उजागर किया।

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप कर इन बाल अपचारियों की दयनीय स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है।

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मनीष वर्मा
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