आगरा:
अपने एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में, आगरा के उप श्रम आयुक्त आगरा, माननीय सियाराम ने दैनिक हिंदी आज प्रकाशन लिमिटेड को एक बड़ा झटका दिया है।
कोर्ट ने दैनिक ‘आज’ समाचार समूह को उनके एक पूर्व पत्रकार, वेदप्रकाश चाहर, को बकाया वेतन और मजीठिया आयोग की सिफारिशों के अनुसार कुल 15,65,196/- रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, इस राशि पर 8% की दर से ब्याज भी चुकाना होगा।

क्या है पूरा मामला ?
यह मामला विविध विवाद संख्या 47/2011 से संबंधित है, जिसमें श्रमिक पक्ष वेदप्रकाश चाहर ने सेवायोजक पक्ष, शार्दुल विक्रम गुप्ता (संपादक, आज समाचार समूह) द्वारा स्थानीय संपादक /व्यवस्थापक आगरा के खिलाफ बकाया वेतन का दावा किया था।
श्रम न्यायालय, आगरा ने 5 फरवरी 2025 को एक विस्तृत आदेश जारी किया था। इस आदेश में यह पाया गया कि वेदप्रकाश चाहर 1 सितंबर 2004 से 11 अगस्त 2011 की अवधि के लिए विभिन्न वेतन आयोगों के तहत निर्धारित वेतन के अंतर के रूप में 12,86,650/- रुपये के हकदार हैं।
इसके अतिरिक्त, मजीठिया आयोग की सिफारिशों के अनुसार 8 जनवरी 2006 से 12 अगस्त 2011 तक की अवधि के लिए 30% अतिरिक्त राशि, यानी 2,78,546/- रुपये, भी उन्हें देय है। इस तरह, कुल देय राशि 15,65,196/- रुपये बनती है।
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सेवायोजक पक्ष की अपील हुई खारिज
श्रम न्यायालय के आदेश के बाद, वेदप्रकाश चाहर ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 6 एच (1) के तहत एक आवेदन प्रस्तुत किया ताकि इस आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
इस पर सुनवाई के दौरान, सेवायोजक पक्ष ने दावा किया कि उन्होंने श्रम न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की है और मामला अभी भी विचाराधीन है।
हालांकि, उप श्रम आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सेवायोजक पक्ष ने उच्च न्यायालय से कोई स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर ) प्रस्तुत नहीं किया है। स्थगन आदेश के अभाव में, श्रम न्यायालय का आदेश प्रभावी माना गया है।
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30 दिन में भुगतान का निर्देश, अन्यथा होगी वसूली:
उप श्रम आयुक्त, आगरा के आदेशानुसार, दैनिक ‘आज’ समाचार समूह को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश की तिथि से तीस दिन के भीतर वेदप्रकाश चाहर को 15,65,196/- रुपये का भुगतान करें। यह भुगतान उप श्रम आयुक्त, आगरा के नाम से चेक या बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, इस राशि पर 20 नवंबर 2012 से भुगतान की तिथि तक 8% की वार्षिक दर से साधारण ब्याज भी देय होगा। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो सेवायोजक के खिलाफ वसूली प्रमाण पत्र (रिकवरी सर्टिफिकेट ) जारी कर दिया जाएगा।
यह आदेश पत्रकार वेदप्रकाश चाहर के लिए एक बड़ी जीत है और यह उन मामलों के लिए एक नजीर बन सकता है जहाँ कर्मचारियों को उनके कानूनी बकाया के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
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