आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने बीमा क्लेम की पूरी राशि का भुगतान न करने को सेवा में बड़ी लापरवाही माना है।
आयोग के अध्यक्ष माननीय आशुतोष और सदस्य पारुल कौशिक की पीठ ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश जारी किया है कि वह शिकायतकर्ता को 45 दिन के भीतर शेष राशि के साथ मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना भी अदा करे।
प्रकरण के अनुसार, लोहामंडी स्थित राजनगर सिविल लाइन निवासी बण्टू ने एक बुलेट मोटरसाइकिल खरीदी थी।
चूंकि वाहन का आरटीओ में पंजीकरण लंबित था, इसलिए उसे पंजीकरण संख्या आवंटित नहीं हो सकी थी। इसी दौरान फरवरी 2019 में उनके निवास से मोटरसाइकिल चोरी हो गई।
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मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट न्यायालय द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद, वाहन स्वामी ने बीमा कंपनी के समक्ष 1 लाख 35 हजार रुपये का दावा प्रस्तुत किया।
बीमा कंपनी ने शुरुआती जांच के बाद 1 लाख 11 हजार 677 रुपये का क्लेम स्वीकार तो किया, लेकिन वास्तव में केवल 54 हजार 290 रुपये का ही भुगतान किया।
पीड़ित द्वारा बार-बार शेष धनराशि की मांग करने के बावजूद कंपनी ने भुगतान से इंकार कर दिया, जिससे क्षुब्ध होकर पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कंपनी के इस रवैये को सेवा में दोष माना।
अब बीमा कंपनी को आदेश दिया गया है कि वह शेष 57 हजार 387 रुपये की धनराशि के साथ-साथ मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में 20 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करे। इसके लिए कंपनी को 45 दिन की समय सीमा दी गई है।
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