आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने उपभोक्ता सेवा में कमी का एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए एल.जी. इलैक्ट्रोनिक्स इण्डिया प्रा. लि. और उसके विक्रेता को आदेश दिया है कि वे न केवल खराब एयर कंडीशनर (AC) को मुफ्त में ठीक करें, बल्कि मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए क्षतिपूर्ति भी प्रदान करें।
मामले की पृष्ठभूमि:
परिवादी पवन कुमार मिश्रा (प्रतिनिधि, मैसर्स आई मेट) ने अपनी फर्म के लिए दो एल.जी. विंडो एसी खरीदे थे:
* प्रथम एसी: 06 जून 2018 को ₹25,500/- में।
* द्वितीय एसी: 12 मई 2019 को ₹24,000/- में।
परिवादी ने इन दोनों एसी के रखरखाव के लिए 05 मार्च 2024 को ₹15,281/- का भुगतान कर एनुअल मेंटिनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) भी लिया था।
परिवादी का आरोप था कि एसी शुरू से ही कूलिंग न करने, अत्यधिक आवाज करने और बार-बार बंद होने जैसी समस्याओं से ग्रस्त थे। कई शिकायतों के बाद भी कंपनी के मैकेनिक ने पार्ट्स बदलने के बजाय केवल ‘काम चलाऊ’ रिपेयर किया।
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विवाद का मुख्य कारण:
फरवरी 2025 में, जब एसी को सर्विस सेंटर ले जाया गया, तो वहां कथित तौर पर उनकी कॉइल्स क्षतिग्रस्त कर दी गईं। जब परिवादी ने इन्हें ठीक करने का अनुरोध किया, तो कंपनी ने टालमटोल की और 04 मार्च 2025 को एएमसी की अवधि समाप्त होते ही मरम्मत करने से साफ मना कर दिया।
आयोग का निर्णय:
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने पाया कि विपक्षी गण (LG इलेक्ट्रॉनिक्स व अनिल इलेक्ट्रॉनिक्स) को नोटिस जारी होने के बावजूद वे पेश नहीं हुए, जिसके कारण कार्यवाही एकपक्षीय रूप से आगे बढ़ाई गई।
अदालत ने निम्नलिखित आदेश पारित किए:
* निःशुल्क मरम्मत: कंपनी 45 दिनों के भीतर AMC के तहत दोनों एसी के क्षतिग्रस्त पार्ट्स बदलकर उन्हें पूरी तरह ठीक करे।
* क्षतिपूर्ति: परिवादी को मानसिक कष्ट के लिए ₹20,000/- और वाद व्यय के रूप में ₹5,000/- का भुगतान किया जाए।
* ब्याज की शर्त: यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो परिवादी कुल राशि (₹64,785/-) पर परिवाद दाखिल करने की तिथि (21.05.2025) से भुगतान की तिथि तक 09% वार्षिक साधारण ब्याज वसूलने का अधिकारी होगा।
महत्वपूर्ण टिप्पणी:
आयोग ने स्पष्ट किया कि जब उपभोक्ता ने वास्तविक मूल्य के अतिरिक्त एएमसी के लिए भारी शुल्क का भुगतान किया है, तो सेवा में ऐसी लापरवाही ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) की श्रेणी में आती है।
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