आगरा: 19 साल पुराने हत्या और दलित उत्पीड़न के मामले में तीनों आरोपी बरी

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आगरा:

जनपद के विशेष न्यायालय (SC/ST एक्ट) ने वर्ष 2007 के एक चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।

विशेष न्यायाधीश माननीय शिव कुमार ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के चलते जीतू चौधरी, बंटी सिद्दीकी और छोटू सिद्दीकी को बरी करने के आदेश जारी किए।

क्या था मामला ?

यह मामला 23 मई 2007 का है। न्यू आगरा थाना क्षेत्र के नगला पदी निवासी वादी राजेश ने थाना हरीपर्वत में तहरीर दी थी कि उसका 25 वर्षीय भाई बंटी, टी.पी. नगर (ट्रांसपोर्ट नगर) में टेम्पू का डीजल पाइप लेने गया था।

रात करीब 9 बजे अज्ञात युवकों ने उसे गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। अस्पताल में उपचार के दौरान घायल भाई ने वादी को बताया था कि ‘लड़की के चक्कर में’ जीतू चौधरी, बंटी सिद्दीकी और छोटू सिद्दीकी ने उसे गोली मारी है।

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पुलिस की कार्रवाई और आरोप पत्र:

पुलिस ने वादी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की। जांच के बाद पुलिस ने सोंठ की मंडी निवासी जीतू चौधरी पुत्र दुर्ग पाल सिंह, और आजाद नगर निवासी बंटी सिद्दीकी व छोटू सिद्दीकी पुत्रगण समी उद्दीन उर्फ लाला के विरुद्ध हत्या (धारा 302 IPC) और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में न्यायालय में आरोप पत्र (Charge Sheet) प्रेषित किया था।

न्यायालय का फैसला और बचाव पक्ष के तर्क:

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी सहित कुल 8 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता कफील कुरैशी ने अदालत में दलील दी कि अभियोजन के गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास है, जिससे घटना की सत्यता पर संदेह उत्पन्न होता है।

आरोपियों को रंजिशन इस मामले में फंसाया गया है और उनके विरुद्ध ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

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बरी करने का आधार:

विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) माननीय शिव कुमार ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा है।

गवाहों के बयानों में असमानता और कानूनी तर्कों को स्वीकार करते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया।

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विवेक कुमार जैन
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