आगरा में हाईकोर्ट बेंच के लिए तेज हुई लड़ाई: अधिवक्ता राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति से मिलेंगे

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आगरा, 26 जून:

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना की पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है।

खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति के संयोजक अरुण सोलंकी, जो युवा अधिवक्ता संघ आगरा मंडल के अध्यक्ष और समिति के प्रवक्ता भी हैं, के नेतृत्व में आगरा के अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन से मिला।

समिति के प्रवक्ता नितिन वर्मा ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता लंबे समय से खंडपीठ की मांग कर रही है, लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह अभी तक संभव नहीं हो पाया है।

उन्होंने जोर दिया कि आगरा में वर्तमान में दो राज्यसभा सांसद और दो लोकसभा सांसद हैं। यदि संसद के दोनों सदनों में पूरी राजनैतिक शक्ति के साथ यह मांग रखी जाए, तो सफलता मिल सकती है।

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सांसद रामजीलाल सुमन का समर्थन:

सांसद रामजीलाल सुमन ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को बताया कि उन्होंने पूर्व में भी राज्यसभा में सरकार से इस मामले में प्रश्न किया था। तब विधि मंत्री ने कहा था कि बेंच की स्थापना के लिए सरकार विचार कर रही है, जिसमें मेरठ और आगरा के बीच विवाद है। हालांकि, जस्टिस जसवंत सिंह आयोग ने आगरा में खंडपीठ की स्थापना की संस्तुति की थी।

सांसद सुमन ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि वह मानसून सत्र में इस मामले को फिर से सरकार के समक्ष उठाएंगे। यदि संभव हुआ, तो वह अधिवक्ताओं को साथ लेकर राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति महोदय से भी मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को जागरूक करने के लिए वह आसपास के सभी जिलों में सभाएं भी आयोजित करेंगे।

इस प्रतिनिधिमंडल में संयोजक अरुण सोलंकी, नितिन वर्मा, सिकंदर सेहरा, अतुल कर्दम, देव गौतम, वीरेंद्र पाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार, जय सक्सेना, राजेंद्र प्रसाद और मनीष अग्रवाल (जोली एडवोकेट) उपस्थित रहे। इस मुलाकात से हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं।

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विवेक कुमार जैन
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